SIR दस्तावेजों को लेकर कुकड़ू अंचल कार्यालय में हंगामा, प्रशासन ने भीड़ जुटाने और दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच शुरू की

MANBHUM UPDATES
3 Min Read

Contents
कुकड़ू, 12 सितंबर: सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड मुख्यालय स्थित अंचल कार्यालय में शनिवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। कुछ लोगों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर प्रभारी अंचलाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की और हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि दस्तावेजों की जांच के दौरान उनके कागजात फाड़े गए। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है।प्रशासन के अनुसार SIR प्रक्रिया के तहत दावा एवं आपत्ति के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित वैध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ आवेदक निर्धारित और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है। प्रभारी सीओ ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग और जिले के वरीय अधिकारियों के निर्देश के अनुरूप संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।अंचल कार्यालय में हंगामे की सूचना मिलने पर तिरुलडीह पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासन की ओर से यह भी जानकारी सामने आई है कि हंगामे के दौरान सरकारी कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और नारेबाजी के मामले की जांच की जा रही है।अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर विवाद की स्थिति क्यों पैदा हुई और कार्यालय में भीड़ किसके आह्वान पर पहुंची? क्या लोगों को SIR प्रक्रिया और स्वीकार्य दस्तावेजों के संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं थी, या फिर किसी स्तर पर उन्हें गलत जानकारी दी गई? इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।प्रशासन की ओर से हंगामे के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी की बात कही गई है। साथ ही मामले की जानकारी निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।SIR जैसी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया में प्रशासन और आम नागरिक, दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति होने पर नारेबाजी या टकराव के बजाय निर्धारित दावा-आपत्ति प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखना ही लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ता है। वहीं प्रशासन के लिए भी जरूरी है कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो और किसी भी पात्र मतदाता को अनावश्यक परेशानी न हो।

कुकड़ू, 12 सितंबर: सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड मुख्यालय स्थित अंचल कार्यालय में शनिवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। कुछ लोगों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर प्रभारी अंचलाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की और हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि दस्तावेजों की जांच के दौरान उनके कागजात फाड़े गए। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है।

प्रशासन के अनुसार SIR प्रक्रिया के तहत दावा एवं आपत्ति के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित वैध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ आवेदक निर्धारित और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है। प्रभारी सीओ ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग और जिले के वरीय अधिकारियों के निर्देश के अनुरूप संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।

अंचल कार्यालय में हंगामे की सूचना मिलने पर तिरुलडीह पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासन की ओर से यह भी जानकारी सामने आई है कि हंगामे के दौरान सरकारी कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और नारेबाजी के मामले की जांच की जा रही है।

अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर विवाद की स्थिति क्यों पैदा हुई और कार्यालय में भीड़ किसके आह्वान पर पहुंची? क्या लोगों को SIR प्रक्रिया और स्वीकार्य दस्तावेजों के संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं थी, या फिर किसी स्तर पर उन्हें गलत जानकारी दी गई? इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

प्रशासन की ओर से हंगामे के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी की बात कही गई है। साथ ही मामले की जानकारी निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।

SIR जैसी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया में प्रशासन और आम नागरिक, दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति होने पर नारेबाजी या टकराव के बजाय निर्धारित दावा-आपत्ति प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखना ही लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ता है। वहीं प्रशासन के लिए भी जरूरी है कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो और किसी भी पात्र मतदाता को अनावश्यक परेशानी न हो।

Share This Article