चांडिल अनुमंडल की बेटी प्रीति महतो ने संस्कृत ऑनर्स में जीता स्वर्ण पदक
ईचागढ़ की बेटी की उपलब्धि पर क्षेत्र में हर्ष, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह हुईं सम्मानित
जमशेदपुर/चांडिल, 08 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल के लिए मंगलवार का दिन गौरव का रहा। ईचागढ़ प्रखंड के चोगा निवासी प्रीति महतो ने संस्कृत ऑनर्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में उन्हें राज्यपाल संतोष गंगवार की मौजूदगी में अतिथियों के हाथों स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआई के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कुल 54 छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। वहीं, विश्वविद्यालय की करीब 1990 छात्राओं को डिग्री एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इन्हीं 54 स्वर्ण पदक विजेताओं में ईचागढ़ की प्रीति महतो भी शामिल रहीं।
प्रीति महतो समाजसेवी सह आजसू नेता हरेलाल महतो के भाई अमित महतो की पत्नी हैं। उनकी इस उपलब्धि से मायके और ससुराल पक्ष के साथ-साथ ईचागढ़ और चांडिल क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
किसान की बेटी ने मेहनत से हासिल किया मुकाम
प्रीति महतो के पिता गुणाधर महतो किसान हैं, जबकि उनकी माता सुगामनी महतो गृहणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी प्रीति ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर उच्च शिक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।
उन्होंने प्राथमिक शिक्षा से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई शहीद अजीत धनंजय महतो शिक्षा निकेतन, चोगा से पूरी की। इसके बाद महिला कॉलेज, चाईबासा से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। आगे उन्होंने जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय से संस्कृत ऑनर्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 77 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
प्रीति ने डीएलएड की डिग्री भी हासिल की है। वर्तमान में वह जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय से ही संस्कृत विषय में एमए की पढ़ाई कर रही हैं।
शादी के बाद भी जारी रखी पढ़ाई
प्रीति महतो का विवाह वर्ष 2025 में आजसू नेता हरेलाल महतो के चचेरे भाई अमित महतो के साथ हुआ। विवाह के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और चांडिल के धातकीडीह स्थित ससुराल में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं।
प्रीति की उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ भी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और लगन के दम पर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं। उनके स्वर्ण पदक जीतने से ईचागढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे चांडिल अनुमंडल में गर्व और खुशी का माहौल है।



