स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर डीसी ने दिया जोर
सरायकेला, 24 अगस्त : समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में उपायुक्त ने जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आम लोगों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
बैठक में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पी.एम. बारा, सभी एमओआईसी, डीपीएमयू, बीपीएमयू एवं संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त ने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की समीक्षा करते हुए सभी को निर्धारित रोस्टर के अनुसार समय पर स्वास्थ्य केंद्रों में उपस्थित रहने और नियमित रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन का भुगतान बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मियों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करने को कहा।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य रख-रखाव मद से प्राप्त राशि के उपयोग की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने एमओआईसी को आवश्यकता आधारित कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण, दवा और उपकरणों की उपलब्धता, स्वच्छता, रंग-रोगन तथा मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाओं पर राशि का समुचित उपयोग करने को कहा गया। अनावश्यक खरीदारी और सामग्री की डुप्लीकेसी रोकने के भी निर्देश दिए गए।
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टॉक रजिस्टर अद्यतन रखने और दवाओं का नियमित भौतिक सत्यापन करने को कहा गया। एक्सपायरी के करीब पहुंच रही दवाओं को आवश्यकता वाले स्वास्थ्य केंद्रों या सदर अस्पताल में नियमानुसार स्थानांतरित करने तथा एक्सपायर्ड दवाओं का नियमानुसार विनष्टीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रंग-रोगन, मरीजों के लिए पर्याप्त कुर्सी-बेंच, बेड, स्पष्ट कक्ष संख्या और साइनेज बोर्ड लगाने को कहा गया। बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए जरूरत के अनुसार जनरेटर, सोलर लाइट और इन्वर्टर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
बैठक में आयुष्मान योजना के लंबित क्लेम, टेलीमेडिसिन, संस्थागत प्रसव, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने लंबित क्लेम के समयबद्ध निष्पादन और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मलेरिया नियंत्रण को लेकर संवेदनशील एवं पीवीटीजी बहुल क्षेत्रों में नियमित मास सर्वे, जांच और उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया। मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए कीटनाशक छिड़काव, मच्छरदानी के उपयोग, स्वच्छता और जलजमाव की रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
टीबी मुक्त पंचायत अभियान की समीक्षा के दौरान गम्हरिया, कुचाई, चांडिल और खरसावां प्रखंड के टीबी प्रभावित गांवों एवं टोलों में विशेष शिविर आयोजित कर सैंपल संग्रह और जांच में तेजी लाने को कहा गया। इसके अलावा सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, डायरिया समेत अन्य बीमारियों की जांच, उपचार और जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
कुपोषित बच्चों के उपचार की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने एमटीसी सेंटरों में बेड ऑक्युपेंसी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने चिन्हित कुपोषित बच्चों और उनके अभिभावकों को जागरूक कर जरूरत के अनुसार बच्चों को एमटीसी में भर्ती कराने और समुचित उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने सभी एमओआईसी को नियमित क्षेत्र भ्रमण और अनुश्रवण करते हुए स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाएं, उपकरण और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।



