कपाली में करोड़ों की जमीन पर दो पक्षों का दावा, सरकारी या पुश्तैनी संपत्ति को लेकर विवाद गहराया

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कपाली में करोड़ों की जमीन पर दो पक्षों का दावा, सरकारी या पुश्तैनी संपत्ति को लेकर विवाद गहराया

चांडिल, 30 जुलाई : सरायकेला खरसावां जिले के कपाली नगर परिषद क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की एक जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। खाता संख्या 311 एवं प्लॉट संख्या 675 और 676 की जमीन पर एक ओर सुरेश सिंह सरदार ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति होने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर कपाली नगर परिषद के उपाध्यक्ष मोहम्मद साहबान उर्फ़ सिंटू इसे सरकारी भूमि बताते हुए भू-माफियाओं द्वारा फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्जे की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। मामले को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, संबंधित जमीन कई वर्षों से खाली पड़ी हुई है। इस पर अब तक कोई स्थायी निर्माण नहीं हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में इस जमीन को लेकर विवाद तेज हो गया है, जिससे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सुरेश सिंह सरदार का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है। उनके अनुसार, करीब 50 वर्षों से एक गरीब परिवार उनकी ओर से इस जमीन की देखरेख कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिनों पहले कुछ लोगों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। विरोध करने पर कपाली नगर परिषद के उपाध्यक्ष मोहम्मद साहबान उर्फ़ सिंटू ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में उन्होंने स्थानीय थाना और सरायकेला के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर आरोपियों पर कार्रवाई तथा अपनी जमीन की सुरक्षा की मांग की है।

वहीं, कपाली नगर परिषद के उपाध्यक्ष मोहम्मद साहबान उर्फ़ सिंटू ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विवादित भूमि सरकारी है और उस पर किसी व्यक्ति का वैध स्वामित्व नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भू-माफिया फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सरकारी जमीन को बचाने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

सिंटू ने दावा किया कि जल्द ही संबंधित सरकारी विभाग द्वारा जमीन की विधिवत नापी कराई जाएगी। यदि जांच में यह भूमि सरकारी पाई जाती है तो यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। मामले की वास्तविक स्थिति राजस्व विभाग की जांच, भूमि अभिलेखों और प्रशासनिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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