SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग, नागरिक संगठनों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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रांची, 19 जून : झारखंड में 30 जून से प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया को लेकर विभिन्न नागरिक संगठनों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। इसी सिलसिले में यूनाइटेड मिली फोरम, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान, एपीसीआर झारखंड, भारत जोड़ो अभियान/साझा कदम तथा झारखंड जनाधिकार महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रस्तावित पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान ग्रामीण, आदिवासी, मुस्लिम एवं महिला मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से छूटने या हटाए जाने की आशंका बनी हुई है। इसे देखते हुए खतियान, वंशावली तथा अन्य पारंपरिक दस्तावेजों को पहचान एवं निवास संबंधी प्रमाण के रूप में मान्यता देने की मांग की गई। साथ ही ग्राम सभाओं की संवैधानिक भूमिका सुनिश्चित करते हुए उन्हें सत्यापन प्रक्रिया में शामिल करने का आग्रह किया गया।

संगठनों ने मतदाता सूची के सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की। उनका कहना था कि जिन व्यक्तियों के नाम सूची से हटाए जाने या छूटने की संभावना हो, उनकी जानकारी ग्राम सभा एवं वार्ड स्तर पर सार्वजनिक की जाए, ताकि समय रहते आपत्तियां और सुधार दर्ज कराए जा सकें।

ज्ञापन में कृषि कार्यों के व्यस्त मौसम को देखते हुए SIR की समय-सीमा बढ़ाने, तथाकथित “तार्किक विसंगति” (Logical Discrepancy) संबंधी प्रावधान को हटाने तथा किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पूर्व कम-से-कम 30 दिनों का लिखित नोटिस अनिवार्य करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

प्रतिनिधिमंडल में यूनाइटेड मिली फोरम के अफजल अनीस, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान के मंथन, एपीसीआर झारखंड के मोहम्मद जियाउलह, साझा कदम/भारत जोड़ो अभियान के प्रवीर पीटर तथा झारखंड जनाधिकार महासभा की एलिना होरो, प्रियशिला, रिया तुलिका पिंगुआ और टॉम कावला शामिल थे। संगठनों ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग सभी वर्गों के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पुनरीक्षण प्रक्रिया को निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी बनाएगा।

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