पेसा नियमावली 2025 के विरोध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री व मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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सरायकेला, 02 जून : पारंपरिक सभा मंच, सरायकेला-खरसावां की ओर से झारखंड सरकार द्वारा लागू की गई पेसा झारखंड नियमावली 2025 के विरोध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं पंचायत राज मंत्री के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आदिवासी समुदाय की पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था एवं स्वशासन प्रणाली को संरक्षित रखने की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि पेसा नियमावली 2025 के तहत ग्रामसभा गठन, बैंक खाता खोलने तथा ग्रामसभा कार्यालय स्थापना की प्रक्रिया में मुखिया, पंचायत सचिव, जनसेवक, वार्ड सदस्य, रोजगार सेवक एवं अन्य सरकारी कर्मियों को शामिल किया गया है। इससे आदिवासी समाज की सदियों पुरानी पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था का सरकारीकरण होने की आशंका है।

प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नियमावली के माध्यम से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर पंचायती राज व्यवस्था थोपी जा रही है तथा पारंपरिक अगुवा जैसे हातु मुंडा, मानकी, परगनैत एवं पड़हा राजा की भूमिका कमजोर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह आदिवासियों के संवैधानिक, कानूनी और पारंपरिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नियमावली के कुछ प्रावधान पेसा अधिनियम 1996 की मूल भावना एवं उसके विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं। प्रतिनिधियों ने दावा किया कि नियमावली में संशोधन के लिए राज्य सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है, इसलिए संशोधन होने तक अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।

पारंपरिक सभा मंच ने राज्य सरकार से मांग की है कि पेसा झारखंड नियमावली 2025 में आवश्यक संशोधन कर इसे पेसा अधिनियम 1996 के अनुरूप बनाया जाए तथा आदिवासी समाज की पारंपरिक ग्रामसभा एवं स्वशासन व्यवस्था को सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए। ज्ञापन की प्रतिलिपि उपायुक्त सरायकेला-खरसावां को भी सौंपी गई है।

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