चांडिल में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कांड पर उठ रहे सवाल! जांच ठंडी या दोषियों को बचाने की तैयारी?
चांडिल, 27 मई : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र निर्गत होने का मामला पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। हालांकि शुरुआती हलचल और प्रशासनिक सक्रियता के बाद अब यह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठने लगे हैं कि कहीं फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। चर्चाओं का केंद्र अब इस बात पर आ टिका है कि क्या इस पूरे फर्जीवाड़े में प्रशासनिक स्तर पर भी मिलीभगत रही है?
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की थी। संबंधित पंचायत सचिवों एवं चांडिल प्रखंड कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही किसी ठोस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि लोगों के मन में संदेह और सवाल दोनों गहराते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिर हजारों की संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कैसे निर्गत हो गए? कौन लोग इस पूरे नेटवर्क में शामिल हैं? कौन दोषी है और कौन निर्दोष? क्या केवल निचले स्तर के कर्मियों को ढाल बनाया जा रहा है या फिर कार्रवाई के नाम पर वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है? ऐसे कई सवाल अब गांवों से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार चांडिल प्रखंड के रसुनिया, रुचाप, चौका समेत कई पंचायतों से बड़ी संख्या में संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये प्रमाण पत्र किसी निजी स्तर पर तैयार किए गए कागज नहीं, बल्कि पूरी सरकारी प्रक्रिया से गुजरकर कंप्यूटर जनरेटेड तरीके से निर्गत हुए दस्तावेज हैं।
नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक आयु वाले आवेदकों का जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन, पंचायत स्तर पर सत्यापन, प्रखंड कार्यालय की प्रक्रिया और अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय से स्वीकृति अनिवार्य होती है। इस पूरी प्रक्रिया में पंचायत सचिव, प्रखंड कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय तथा अनुमंडल कार्यालय की जवाबदेही तय होती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद भी फर्जी प्रमाण पत्र आखिर कैसे जारी हो गए?
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर लिखित शिकायत भी की गई है। लोगों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। इधर, चांडिल प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जांच शुरू होने की पुष्टि तो की है, लेकिन पत्रकारों के सवालों पर फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
इधर, पूरे मामले में चांडिल प्रखंड कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता का नाम भी चर्चाओं में है। प्रमाण पत्र आवेदन सूची में उनका नाम अंकित होने के कारण लोगों के बीच संदेह गहरा गया है। चर्चा है कि उनकी लापरवाही अथवा भूमिका के कारण ही फर्जी प्रमाण पत्रों का यह मामला सामने आया। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिलचस्प बात यह भी है कि फर्जीवाड़े की चर्चाएं तेज होने के बाद से राकेश गुप्ता सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। उनके संबंध में अधिकारी भी स्पष्ट जानकारी देने से बचते दिखाई दे रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाती है या फिर इस मामले में वास्तविक दोषियों तक पहुंचकर कार्रवाई की जाती है। फिलहाल चांडिल में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कांड लोगों के बीच अविश्वास, सवाल और चर्चाओं का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।