स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गंगामनी महतो ने बदली अपनी पहचान, अब ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कर रहीं प्रेरित

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स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कुकडू की गंगामनी महतो ने बदली अपनी पहचान, अब ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए कर रहीं प्रेरित

कुकड़ू, 14 मई : महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर सफलता की महिलाएं नई मिसाल लिख रही हैं। महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायी उदाहरण बनी है सरायकेला – खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत हेंसालोंग गांव की गंगामनी महतो। गंगामनी महतो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)से जुड़कर सफलता की कहानी गढ़ रही है। मनिहारी एवं जूता-चप्पल व्यवसाय के माध्यम से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति दिन पर दिन मजबुत होती जा रही है।

हेसालोंग गांव की निवासी गंगामनी महतो ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। “यमुना आजीविका सखी मंडल” से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हुए न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि आज वे अपने गांव एवं आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

वर्ष 2020 में गठित स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व उनका परिवार मुख्य रूप से कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर था। सीमित आय के कारण परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समूह से जुड़ने के बाद नियमित बचत, सामूहिक बैठक एवं आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास एवं आर्थिक समझ विकसित हुई।

समूह के सुचारू संचालन एवं ग्राम संगठन के सहयोग से उन्होंने CIF मद से 50,000 रुपये की ऋण लिया। ऋण की राशि एवं स्वयं की पूंजी निवेश कर उन्होंने मनिहारी एवं जूता-चप्पल की दुकान प्रारंभ की। वर्तमान में उनके द्वारा संचालित व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 1,20,000 रुपये की आय हो रही है। इसके अलावा कृषि कार्य से भी परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की अपेक्षा काफी बेहतर हुई है।

झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं से प्राप्त लाभ भी उनके परिवार के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण में सहायक सिद्ध हो रहा है। वर्तमान में वे अपने बच्चों की शिक्षा, घरेलू आवश्यकताओं एवं सामाजिक दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन एवं व्यवसाय संचालन की जानकारी मिली, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने में सफल हुईं।

गंगामनी महतो अपने गांव एवं आसपास की महिलाओं को भी समूह से जुड़ने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीणों द्वारा भी उनके प्रयासों की सराहना की जा रही है तथा उन्हें एक मेहनती एवं प्रेरणादायी महिला उद्यमी के रूप में देखा जा रहा है। उनके कार्यों से प्रभावित होकर कई महिलाएं स्वयं सहायता समूह एवं स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं।

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