धनबाद में फिर उभरा ‘भूमिगत खतरा’: टंडाबाड़ी में भू-धंसान ने खोली सिस्टम की पोल, सड़क जाम कर फूटा जनाक्रोश

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धनबाद, 24 अप्रैल : कोयलांचल की जमीन के नीचे सुलग रही पुरानी आग एक बार फिर सतह पर दिखी, जब सोनारडीह ओपी क्षेत्र के टंडाबाड़ी बस्ती में अचानक भू-धंसान की घटना हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ 3-4 लोगों को घायल किया, बल्कि इलाके में लंबे समय से मंडरा रहे ‘भूमिगत खतरे’ को भी उजागर कर दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जमीन धंसने की घटना अचानक हुई, जिससे वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। घायलों में अरमान नामक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे तत्काल असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य घायलों का इलाज तिलाटांड़ अस्पताल में जारी है। हालांकि प्रशासन अब तक घायलों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं कर पाया है।

नीचे आग, ऊपर जिंदगी — डर के साए में जी रहे लोग

टंडाबाड़ी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग वर्षों से भूमिगत आग और खाली खदानों के ऊपर बसे होने के खतरे के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के ठोस इंतजाम कब किए जाएंगे।

गुस्साए ग्रामीणों ने रोकी रफ्तार

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बोकारो-धनबाद एनएच-32 को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीसीसीएल और जिला प्रशासन लगातार चेतावनियों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिसका खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

जिम्मेदारी किसकी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी छोटे-बड़े धंसान की घटनाएं होती रही हैं, लेकिन हर बार केवल जांच और आश्वासन तक ही मामला सीमित रह जाता है। इस बार ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक स्थायी समाधान और मुआवजे की घोषणा नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

धनबाद जैसे कोल बेल्ट में बार-बार हो रहे भू-धंसान क्या केवल ‘प्राकृतिक घटना’ हैं या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही और खनन कंपनियों की अनदेखी का परिणाम है?
इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास की कीमत आखिर कब तक आम लोग अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाते रहेंगे।

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