क्या DC की आंखों में धूल झोंक रहे DMO? ‘सफाई’ के नाम पर अवैध खनन का खेल या फोटो खिंचाऊं कार्रवाई!

Manbhum Updates
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सरायकेला/चांडिल, 22 अप्रैल : जिले में स्वर्णरेखा नदी के मानीकुई पुल के नीचे चल रही गतिविधियों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से यहां चार-चार पोकलेन मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर बालू उठाव का कार्य जारी है। प्रशासनिक स्तर पर इसे “नदी सफाई” बताया जा रहा है, लेकिन कार्य के तरीके और पैमाने को लेकर स्थानीय लोगों में संदेह गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात भारी मशीनों से हो रहा कार्य सामान्य सफाई अभियान से कहीं अधिक प्रतीत होता है। उनका सवाल है कि यदि यह केवल सफाई है, तो इतनी बड़ी मात्रा में बालू का उठाव क्यों किया जा रहा है? साथ ही यह भी चर्चा है कि क्या इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जिला प्रशासन तक सही तरीके से पहुंचाई जा रही है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्य जिला खनन पदाधिकारी (DMO) के संज्ञान में हो रहा है। हालांकि, अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं “सफाई” की आड़ में अवैध खनन तो नहीं किया जा रहा। यदि ऐसा पाया जाता है, तो यह खनन नियमों, पर्यावरण संरक्षण कानूनों तथा सरकारी राजस्व से जुड़े गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है।
इस बीच, Manbhum Updates पर खबर प्रसारित होने के बाद घटनास्थल पर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, जहां पहले बालू का बड़े पैमाने पर भंडारण किया गया था, अब उसे मिट्टी और कचरे से ढंकने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोग इसे सबूत छिपाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, जिला खनन पदाधिकारी द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छापेमारी अभियान की जानकारी दी गई है। विज्ञप्ति के अनुसार, ईचागढ़, चांडिल और चौका थाना क्षेत्रों में अभियान चलाया गया, जिसमें न तो अवैध खनन पाया गया और न ही कोई अवैध परिवहन। साथ ही दो फोटो भी जारी किए गए हैं।


हालांकि, इन फोटो को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि जारी तस्वीरें सरायकेला थाना क्षेत्र की हैं, जबकि प्रेस विज्ञप्ति में अन्य क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि जिन क्षेत्रों में कार्रवाई की बात कही गई, वहां की तस्वीरें क्यों साझा नहीं की गईं। यह स्थिति संदेह को और गहरा करती है, हालांकि इस पर भी आधिकारिक स्पष्टीकरण अपेक्षित है।

नदी से बालू उठाव माइनिंग लीज, पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance) और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किया जा सकता है। बिना वैध अनुमति या तय सीमा से अधिक खनन करना अवैध खनन की श्रेणी में आता है, जो खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय है। वहीं “नदी सफाई” के नाम पर कार्य करने के लिए भी संबंधित विभागों से स्पष्ट अनुमति और दिशा-निर्देश आवश्यक होते हैं।
अब इस पूरे मामले में जिला उपायुक्त (DC) की भूमिका अहम हो जाती है। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मानीकुई पुल के नीचे चल रहा कार्य वास्तव में सफाई अभियान है या नियमों के विपरीत कोई गतिविधि।
फिलहाल, स्वर्णरेखा नदी के किनारे जारी इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह पारदर्शी कार्रवाई है या फिर कहीं न कहीं जवाबदेही से बचने की कोशिश? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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