जमशेदपुर, 13 अप्रैल : बिष्टुपुर में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। चाय दुकान चलाने वाली युवती मेहंदी पर कुछ दबंग मनचलों द्वारा खौलती चाय फेंक दी गई, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई। घटना के तुरंत बाद उसे इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। इस बीच विवाद तब गहरा गया जब आरोप लगा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पीड़िता के परिजनों से इलाज का खर्च मांगा जा रहा है। जबकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि ज्वलनशील पदार्थ (एसिड या खौलते तरल) से हमले के मामलों में पीड़ित को सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराना अनिवार्य है। भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन, पूर्वी सिंहभूम के जिला अध्यक्ष श्री एस. एन. पाल ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन से सवाल किया है कि क्या निजी अस्पताल कानून से ऊपर हैं? उन्होंने मांग की है कि पीड़िता का पूरा इलाज तत्काल निःशुल्क कराया जाए और नियमों की अनदेखी करने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई हो। संगठन ने पीड़िता को मुआवजा देने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। फिलहाल यह मामला शहर में आक्रोश का कारण बना हुआ है और लोग पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।