झारखंड में समय-निर्धारण पर घमासान : गर्मी में बच्चों की सुरक्षा बनाम प्रशासनिक उदासीनता

Manbhum Updates
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मानभूम अपडेट्स – डेस्क, 30 मार्च : झारखंड में ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक सत्र को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बढ़ती गर्मी और लू के खतरे के बीच जहां स्कूलों को सुबह के समय संचालित करने की परंपरा रही है, वहीं इस वर्ष समय-निर्धारण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

गौरतलब है कि भीषण गर्मी और दोपहर की लू से विद्यार्थियों को बचाने के लिए हर साल स्कूलों का संचालन प्रातःकाल में किया जाता है। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन इस बार जारी किए गए नए आदेश में पुराने समयावधि को ही लागू रखा गया है, जिससे अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई है।

कोरोना काल के दौरान बाधित पढ़ाई की भरपाई के लिए शैक्षणिक सत्र 2022–23, 2023–24 और 2024–25 तक अतिरिक्त समय बढ़ाया गया था। अब जबकि उस क्षति की भरपाई हो चुकी है, फिर भी पुराने समय-निर्धारण को जारी रखना सवाल खड़े कर रहा है।

राज्य के अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण होने के कारण बच्चों के सामने व्यावहारिक समस्याएं भी हैं। सुबह 7 बजे तक नहाकर विद्यालय पहुंचना कई छात्रों के लिए कठिन होता है, वहीं दोपहर 1 बजे घर लौटकर भीषण गर्मी में दैनिक दिनचर्या निभाना भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

इस संदर्भ में विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा बच्चों के हित में समय परिवर्तन को लेकर आवेदन भी दिए गए हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्णय या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

समाजसेवी सह शिक्षक गुणाधर महतो ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ सकता है।

ज्ञात हो कि 1 अप्रैल से प्रातःकालीन सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन समय को लेकर जारी असमंजस ने अभिभावकों और छात्रों दोनों को परेशानी में डाल दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं कि आखिर बच्चों के हित में क्या कदम उठाया जाता है।

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