चांडिल, 29 मार्च : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत ऑल अनोल अलोआ वाकुल, रामगढ़ में भुमिज भाषा वार्षिक परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। यह परीक्षा टाटा स्टील फाउंडेशन के जनजातीय भाषा साक्षरता कार्यक्रम एवं आयोन आखड़ा तिरिलडीह के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम के दौरान भुमिज समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि निरीक्षण के लिए उपस्थित रहे। इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी सामने आई है। झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 में जनजातीय भुमिज भाषा को पुनः शामिल कर लिया गया है। झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (प्राथमिक शिक्षा निदेशालय) द्वारा इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और रांची जिलों के लिए अधिसूचना जारी की गई है। भुमिज भाषा को JTET में पुनः शामिल कराने में पोटका विधायक संजीव सरदार की अहम भूमिका रही है। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया, जिसके बाद विभागीय मंत्री ने संज्ञान लेते हुए इसे पुनः शामिल करने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि JTET 2012 और 2016 की परीक्षाओं के बाद भुमिज भाषा को हटा दिया गया था। इस बार पुनः शामिल किए जाने से पूरे भुमिज समाज में खुशी और उत्साह का माहौल है। समाज की ओर से पोटका विधायक संजीव सरदार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र नाथ सिंह, राधेश्याम सिंह, सुशेन सिंह, रविन्द्र सरदार, गंगे सुमन देव सरदार, विशंभर सिंह, अजय सिंह, आशा सिंह, चंद्रकना सिंह, दीपाली सिंह, इशारानी सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।