
सरायकेला, 23 मार्च : जमीन सौदों में गहराते भ्रष्टाचार के जाल पर सोमवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ऐसा सर्जिकल स्ट्राइक किया, जिसने पूरे नेटवर्क की परतें उधेड़ दीं। यह कार्रवाई महज रिश्वतखोरी की एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र और बिचौलियों के गठजोड़ की उस जमीनी सच्चाई को सामने लाती है, जो लंबे समय से आम लोगों को प्रभावित करती रही है।
ACB की टीम ने एक ही समय में दो अहम ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए सिस्टम के दो चेहरे उजागर किए। एक, जो दफ्तर के भीतर बैठकर फैसलों को प्रभावित करता है, और दूसरा, जो बाहर रहकर सौदे को अंजाम तक पहुंचाता है।
मामले की जड़ में करीब 40 लाख रुपये की एक कथित जमीन डील थी, जिसकी पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये का लेन-देन होना तय हुआ था। इसी इनपुट पर ACB ने जाल बिछाया और पूरी रणनीति के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया।
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब समाहरणालय में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक के बीच ही भू-अर्जन विभाग के लिपिक प्रीतम आचार्य को हिरासत में ले लिया गया। यह संकेत था कि कार्रवाई सिर्फ बाहरी स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे के भीतर तक पहुंच चुकी है।
उधर, गम्हरिया प्रखंड कार्यालय परिसर में विनय कुमार तिवारी नामक कथित दलाल को उसकी कार में नकदी गिनते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह इस पूरे सौदे में कड़ी के रूप में काम कर रहा था, जो अंदर और बाहर के नेटवर्क को जोड़ता था।
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को जमशेदपुर स्थित ACB कार्यालय ले जाकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने समय से इस तरह के सौदे संचालित हो रहे थे।
इस ऑपरेशन ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम लोगों के बीच यह उम्मीद भी जगाई है कि जमीन से जुड़े मामलों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सख्ती से लगाम लग सकती है।



