लंबित मुआवजा के मुद्दे पर जेएलकेएम की सशक्त पहल, राज्यपाल के समक्ष मजबूती से उठी रैयतों की आवाज

रांची/ जमशेदपुर, 05 फरवरी : वर्षों से लंबित मुआवजा भुगतान की पीड़ा झेल रहे रैयतों और प्रभावित ग्रामीणों की आवाज को मजबूती देने के उद्देश्य से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राजभवन में राज्यपाल से शिष्टाचार मुलाकात की। यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही, बल्कि जमीनी समस्याओं को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने का एक प्रभावी प्रयास साबित हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि बेलटाड़ (पूर्वी सिंहभूम) से रघुनाथपुर (सरायकेला-खरसावां), भुईयांसिनान से रसिकनगर–सुसनी तथा भादुडीह–बोंटा–सातनाला–बोड़ाम होते हुए माधवपुर (पश्चिम बंगाल सीमा) तक प्रस्तावित व निर्मित सड़कों के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में अनेक रैयत परिवार आज भी अपने उचित मुआवजे से वंचित हैं। इसके चलते उन्हें आर्थिक तंगी के साथ-साथ सामाजिक असुरक्षा का भी सामना करना पड़ रहा है।
जेएलकेएम प्रतिनिधिमंडल ने इस गंभीर समस्या को तथ्यों के साथ रखते हुए राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और आग्रह किया कि संबंधित विभागों व जिला प्रशासन को निर्देश देकर लंबित मुआवजा भुगतान शीघ्र सुनिश्चित कराया जाए।
राज्यपाल ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए प्रतिनिधिमंडल को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिससे प्रभावित ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है।
इस अवसर पर जेएलकेएम के केंद्रीय संयुक्त महासचिव देवव्रत महतो, जिला प्रवक्ता सुब्रत महतो, प्रखंड अध्यक्ष सुभाष चन्द्र महतो सहित अरुण गोप, मंगल महतो, सीताराम सिंह, मृत्युंजय महतो, मनोहर गोप, नन्दलाल गोप, वीर सिंह, प्रदीप महतो, गोपाल महतो, संदीप कुमार, प्रसेनजीत कुमार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
जनहित में संघर्ष की मिसाल बना जेएलकेएम
स्थानीय लोगों का मानना है कि जेएलकेएम द्वारा लगातार जनसमस्याओं को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उठाया जाना संगठन की जनपक्षधर सोच, संवेदनशील नेतृत्व और मजबूत संगठनात्मक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल न केवल मुआवजा पीड़ितों के लिए आशा की किरण है, बल्कि जनहित के मुद्दों पर संगठित संघर्ष की एक सकारात्मक मिसाल भी है।



