टुसू और हाल पुन्हा पर्व से गांवों में उमंग, नई फसल व कृषि कार्य की शुरुआत

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टुसू और हाल पुन्हा पर्व से गांवों में उमंग, नई फसल व कृषि कार्य की शुरुआत

चांडिल, 16 जनवरी : मिट्टी की सोंधी खुशबू, लोकगीतों की मधुर धुनों और पारंपरिक उल्लास के साथ ग्रामीण इलाकों में टुसू पर्व और हाल पुन्हा श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले इन लोकपर्वों ने गांवों में सांस्कृतिक रंग बिखेर दिया।
टुसू पर्व नई फसल और नई आशाओं का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा में टुसू गीत, पारंपरिक सजावट और सामूहिक आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।

‘टुसू’ शुद्धता, सृजन और नवजीवन के भाव को दर्शाता है। इसी अवसर पर मनाया जाने वाला हाल पुन्हा, जिसे आखाईन जात्रा भी कहा जाता है, कृषि कार्य की शुरुआत का प्रतीक है। माघ महीने के पहले दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर किसानों ने अपनी कृषि भूमि पर प्रतीकात्मक रूप से ढाई चक्कर हल चलाकर नए कृषि सत्र का शुभारंभ किया।

हाल पुन्हा को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व कृषि कार्य की शुरुआत और किसान व प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। पर्व के दौरान गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सामूहिक उत्सव का आयोजन किया गया।

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