दलमा में गरीब आदिवासी का घर ढहाया, कॉरपोरेट अतिक्रमण पर चुप्पी क्यों? वन विभाग पर भेदभाव और कानून उल्लंघन का आरोप

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दलमा में गरीब आदिवासी का घर ढहाया, कॉरपोरेट अतिक्रमण पर चुप्पी क्यों? वन विभाग पर भेदभाव और कानून उल्लंघन का आरोप

 

चांडिल, 10 जनवरी : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी अंतर्गत चांडिल थाना क्षेत्र के काठजोड़ गांव में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। शुक्रवार को वन विभाग ने अतिक्रमण के आरोप में निर्माणाधीन एक घर को ढहा दिया, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, रविदास मार्डी नामक व्यक्ति द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण कर घर निर्माण कराए जाने का आरोप लगाते हुए वन विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकान को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई को ग्रामीणों ने एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है।

वन विभाग की इस कार्रवाई के विरोध में दलमा क्षेत्र ग्रामसभा सुरक्षा मंच, कोल्हान के केंद्रीय सचिव सुखलाल पहाड़िया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने काठजोड़ पहुंचकर पीड़ित रविदास मार्डी से मुलाकात की और वन विभाग के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सुखलाल पहाड़िया ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन और ग्रामसभा के अधिकारों का सीधा अपमान है। उन्होंने कहा कि झारखंड में वन अधिकार कानून के तहत सामूहिक एवं व्यक्तिगत वन पट्टा देने का स्पष्ट प्रावधान है, इसके बावजूद गरीब आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वन विभाग को किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पूर्व ग्रामसभा को लिखित सूचना देना अनिवार्य था, क्योंकि ग्रामसभा ही ऐसे मामलों में निर्णय लेने की सर्वोच्च इकाई है। ग्रामसभा को दरकिनार कर की गई यह कार्रवाई असंवैधानिक है।

वन विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए सुखलाल पहाड़िया ने कहा, “जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। जब स्वयं वन विभाग के अधिकारी गैरकानूनी और असंवैधानिक गतिविधियों में संलिप्त हैं, तब भोले-भाले आदिवासियों के आशियाने तोड़ना कहां तक न्यायसंगत है?”

उन्होंने वन विभाग से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि क्या काठजोड़ के रविदास मार्डी ही अकेले व्यक्ति हैं जिन्होंने वन भूमि पर अतिक्रमण किया है? दलमा तराई क्षेत्र के आसनबनी पंचायत में स्थापित दर्जनों कंपनियां, होटल, रेस्टोरेंट, फ्लैट और डुप्लेक्स क्या वन भूमि पर नहीं बने हैं? क्या ये सभी निर्माण वन अधिनियम और इको-सेंसिटिव जोन के नियमों का पालन करते हैं?

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग गरीब और कमजोर आदिवासियों पर तो बुलडोजर चलाता है, लेकिन बड़े कारोबारी और प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों पर आंख मूंद लेता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बंद नहीं हुई, तो दलमा क्षेत्र में व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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