मकर संक्रांति से पहले चांडिल डैम का जलस्तर घटाने की मांग, छाता पोखर मेला पर मंडराया जलभराव का खतरा

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मकर संक्रांति से पहले चांडिल डैम का जलस्तर घटाने की मांग, छाता पोखर मेला पर मंडराया जलभराव का खतरा

चांडिल, 26 दिसंबर : मकर संक्रांति पर्व पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक छाता पोखर मेला के सफल आयोजन को लेकर चांडिल अनुमंडल अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड की ओढ़िया पंचायत स्थित दयापुर–कुमारी गांव में चिंता गहराने लगी है। वर्तमान में चांडिल डैम का जलस्तर 180 RL से ऊपर होने के कारण छाता मां का मंदिर, पूजा स्थल एवं मेला क्षेत्र जलमग्न है, जिससे मकर संक्रांति पर्व और मेले के आयोजन में गंभीर बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि जलभराव के कारण पूरे क्षेत्र में कीचड़ फैल गया है। यदि समय रहते डैम का जलस्तर कम नहीं किया गया तो हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह ऐतिहासिक मेला प्रभावित हो सकता है। मकर संक्रांति के दिन दुलमी, दयापुर, ओढ़िया, हेंसालोंग, पलाशडीह, जानुम, कुमारी, झापागोड़ा, झिमड़ी, पारगामा, किशुनडीह, सिरुम, काररगामा, बेरासी, आदारडीह, बंदाबीर, चौका, लापांग, ईचाडीह, लेटेमदा, दारुदा सहित अनेक गांवों से श्रद्धालु यहां पवित्र स्नान व पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

उन्होंने छाता पोखर के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकमान्यताओं के अनुसार ताल-बेताल सिद्ध महाराज द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर यहां स्नान एवं पूजा की परंपरा प्रारंभ की गई थी। वहीं लोककथाओं में उल्लेख है कि महाराज विक्रमादित्य ने अपनी पत्नी प्रभावती देवी के स्नान हेतु दैविक शक्ति से एक ही रात में विशाल छाता पोखर का निर्माण कराया और उसके मध्य छाता मां के मंदिर की स्थापना की थी। यह परंपरा सदियों से निरंतर चली आ रही है।

क्षेत्र में गहरी मान्यता है कि छाता मां के दरबार में सच्चे मन से की गई पूजा से संतान सुख, रोग मुक्ति, पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विवाह संबंधी लोकविश्वासों में भी छाता मां को संकट हरने वाली कुलदेवी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है।

राकेश रंजन महतो ने कहा कि छाता पोखर एवं मेला क्षेत्र केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जिला प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए समय रहते चांडिल डैम का जलस्तर घटाने की मांग की है।

इस संबंध में उपायुक्त सरायकेला–खरसावां को ज्ञापन सौंपकर सर्वसम्मति से यह मांग रखी गई है कि प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर्व एवं छाता पोखर मेला से पूर्व चांडिल डैम का जलस्तर नियमानुसार 180 RL से नीचे किया जाए, ताकि मंदिर, पूजा स्थल और मेला क्षेत्र जलमग्न न हों। मांग पत्र की प्रतिलिपि संबंधित विधायक, सांसद, जिला परिषद उपाध्यक्ष, स्वर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों एवं स्थानीय प्रशासन को भी भेजी गई है।

उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जनआस्था, धार्मिक परंपरा और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए ही मकर संक्रांति पर्व और छाता पोखर मेला शांतिपूर्ण एवं श्रद्धापूर्वक संपन्न हो सकेगा। इस अवसर पर विस्थापित नरेश साहू भी उपस्थित थे।

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