भीड़ से नही डरेगा कुड़मी समाज, प्रमंडलवार होगा जोरदार आंदोलन
जमशेदपुर, 09 अक्टूबर : अपने हक व अधिकार के लिए कुड़़मी समाज पुनः एकबार आंदोलन का रुख अख्तियार करनेवाला है। इसको लेकर गुरुवार को निर्मल गेस्ट हाउस में हुई कोल्हान स्तरीय बैठक में ‘वृहद झारखंड कुड़़मी समन्वय समिति’ का गठन किया गया। बैठक के उपरांत समिति के संयोजक हरमोहन महतो, शीतल ओहदार व कुड़मी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की।
उन्होंने बताया कि इसके तहत राज्य के अलग अलग प्रमंडल में तिथिवार आंदोलन होगा. इसकी शुरुआत 2 नवंबर को हजारीबाग, 16 नवंबर को बोकारो के चंदनकियारी, 23 नवंबर को पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर, 2 दिसंबर को धनबाद व 14 दिसंबर को बोकारो के नावाडीह में रैली होगी। इसके बाद 11 जनवरी, 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में महारैली होगी। इन रैली का नाम ‘कुड़़मी अधिकार रैली’ दिया गया है।
बताया कि अगर इन रैलियों के बाद भी केंद्र सरकार अधिकारों के प्रति समुचित ध्यान नही दिया, तो समाज आर्थिक नाकेबंदी करने पर भी विचार हो सकता है। शीतल ओहदार ने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में कुड़़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध करने, कुड़़माली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने व समाज के शहीदों के लगातार हो रहे अपमान पर रोक लगाने की मांग शामिल है।
हरमोहन ने कहा कि हमारा आंदोलन किसी समाज के विरुद्ध नही है, बल्कि अपनी अस्मिता की रक्षा करना है। असल मे समाज का रेल रोको आंदोलन की सफलता व ईसाई बन चुके आदिवासी का नाम सूची से हटाने के विरोध में प्रायोजित प्रदर्शन है। मौके पर शैलेंद्र महतो ने कहा कि किसी भी समाज की भीड़़ से कुड़़मी घबरानेवाले नही है। यह समाज डरनेवाला नही, बल्कि लड़ने वाला है। आनेवाले दिनों में इस तरह के किसी भी प्रयास का ईंट का जवाब चट्टान से मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अरविंद महतो ने कहा कि प बंगाल में समाज के आंदोलन पर उच्च न्यायालय की रोक के बावत सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। कोर्ट के समक्ष इस बातों को रखा जाएगा कि अगर हमारे मौलिक अधिकारों पर रोक लग सकती है तो देश के सभी समाज के आंदोलन पर रोक लगा दिया जाए।