153 वर्षों से जगमगा रहा चांडिल का दुर्गोत्सव, कोल्हान के डीआईजी ने किया माँ दुर्गा का दर्शन

चांडिल, 29 सितंबर : माँ दुर्गा की भक्ति से आलोकित चांडिल का ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर इस बार भी श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना रहा। 153 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही सार्वजनिक पूजा समिति सोलह आना, चांडिल बाजार की दुर्गा पूजा में सोमवार को कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने शिरकत की।
माँ दुर्गा के दरबार में पहुँचते ही डीआईजी का समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं ने परंपरागत स्वागत किया। माँ के चरणों में नमन कर उन्होंने पूरे कोल्हान क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा –
“दुर्गा पूजा और विजयादशमी हमें अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है। समाज से बुराइयों के नाश हेतु सभी को एकजुट होना होगा।”
बच्चों की भक्ति-भावना ने बाँधा समा
महासप्तमी के उपलक्ष्य में आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में नन्हे-मुन्ने बच्चे जब भगवान शिव-पार्वती, सीता-राम, राधा-कृष्ण, कार्तिक, गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में मंच पर उतरे, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने विजयी प्रतिभागियों को उपहार प्रदान कर प्रोत्साहित किया।
वहीं, पारंपरिक दासांई नाच प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को भी डीआईजी ने अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। सम्मान पाकर कलाकारों और बच्चों के चेहरे श्रद्धा और गर्व से खिल उठे।
विधायक ने दी मंगलकामनाएँ
इस पावन अवसर पर ईचागढ़ की विधायक सविता महतो ने भी मंदिर पहुँचकर माँ दुर्गा की आराधना की। उन्होंने कहा कि –“दुर्गा पूजा केवल आनंद और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि सच्चाई और एकता की शक्ति का प्रतीक है। आइए हम सब मिलकर इसे भाईचारे के साथ मनाएँ।”
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने डीआईजी से आग्रह किया कि चांडिल बाजार से भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इस अवसर पर चांडिल और सरायकेला के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला परिषद सदस्य पिंकी लायक, पूर्व उपाध्यक्ष देवाशीष राय, आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो, डॉ. शिशिर चटर्जी, समिति अध्यक्ष अभिजीत दां, सचिव मिलन प्रामाणिक, आशीष मंडल समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
माँ दुर्गा की जयकारों से गूँज उठा चांडिल
सदियों पुरानी परंपरा और श्रद्धा से सजी यह पूजा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली आध्यात्मिक धारा है। चांडिल का हर गली-चौराहा माँ दुर्गा की महिमा और विजयादशमी के संदेश से आलोकित है।



