सोमा मुंडा हत्या के विरोध में चांडिल में उग्र प्रदर्शन, टाटा–रांची एनएच जाम — आदिवासी संगठनों ने चेताया, “अब अन्याय बर्दाश्त नहीं”

चांडिल, 17 जनवरी : खूंटी के आदिवासी समाज के पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आहूत झारखंड बंद का व्यापक असर चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में भी देखने को मिला। संयुक्त आदिवासी संगठन, चांडिल अनुमंडल के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उतरे और चांडिल थाना क्षेत्र के घोड़ानेगी के समीप टाटा–रांची नेशनल हाइवे एवं चांडिल – पुरुलिया नेशनल हाइवे को जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाइवे पर टायर जलाकर मार्ग अवरुद्ध किया और जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान “सोमा मुंडा अमर रहें”, “सोमा मुंडा के हत्यारों को गिरफ्तार करो”, “हत्यारों को फांसी दो”, “आदिवासी एकता जिंदाबाद” जैसे नारों से इलाका गूंज उठा। सड़क जाम के कारण दोनों मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे अनेकों मालवाहक एवं यात्री वाहन फंसे रहे।
हालांकि, मार्ग अवरुद्ध किए जाने की सूचना मिलते ही चांडिल थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया और काफी समझाइश के बाद जाम हटवाया गया। इसके बाद नेशनल हाइवे पर वाहनों का परिचालन पुनः सामान्य हो सका।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता, सुरक्षा और सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से शांति और सहअस्तित्व में विश्वास करता रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अन्याय और अत्याचार को चुपचाप सहता रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी नहीं हुई और उन्हें कठोर सजा नहीं दी गई, तो आदिवासी समाज और भी व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रकाश मार्डी ने भी अपने संबोधन में कहा कि आज आदिवासियों पर लगातार हमले हो रहे हैं, उनकी जमीन, जंगल और जीवन पर खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब आदिवासी समाज डरने वाला नहीं है, बल्कि हर अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करेगा।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से सुखलाल पहाड़िया, भूषण पहाड़िया, राधेश्याम सिंह सरदार, मानिक सिंह सरदार, महावीर मुर्मू, डोमन बास्के, प्रकाश मार्डी, गुरुचरण लोहार, मंगल पहाड़िया, कालीचरण पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि सोमा मुंडा के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन्हें फांसी जैसी कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आदिवासी समाज खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।



