परिजायी श्रमिक बिरिंची कर्मकार के परिवार को मिलेगी 75 हजार रुपये की सहायता, JSM की पहल पर प्रशासन का सकारात्मक रुख

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पुरुलिया, 28 अक्टूबर : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में मृत प्रवासी श्रमिक बिरिंची कर्मकार के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग पर जंगलमहल स्वराज मोर्चा (JSM) की पहल का सकारात्मक असर देखने को मिला है। जिला प्रशासन ने परिवार को राज्य सरकार की प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना के तहत आर्थिक सहायता के योग्य बताया है। इसके तहत परिवार को मृत्यु मुआवजे के रूप में 50 हजार रुपये और वापसी सहायता के रूप में 25 हजार रुपये, कुल 75 हजार रुपये मिलने की पात्रता है। फिलहाल सहायता राशि देने की प्रक्रिया चल रही है।

जानकारी के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को बिरिंची कर्मकार की मृत्यु के बाद उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया था। परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए जंगलमहल स्वराज मोर्चा के केंद्रीय समिति सदस्य अरित्र महतो ने मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता की मांग उठाई थी। उन्होंने पुरुलिया के जिलाधिकारी के माध्यम से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की मांग की थी।

इस आवेदन पर कार्रवाई करते हुए 28 अक्टूबर को असिस्टेंट लेबर कमिश्नर, पुरुलिया सदर पश्चिम ने ईमेल के माध्यम से संगठन को सूचित किया कि मृत श्रमिक का परिवार राज्य सरकार की प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने का पात्र है। इसके बाद संगठन ने प्रशासन की इस पहल पर संतोष जताया है।

JSM के केंद्रीय समिति सदस्य अरित्र महतो ने कहा कि परिवार की सहायता के लिए पात्रता की जानकारी देने पर वे जिला प्रशासन के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु से उसके परिवार को मानसिक आघात के साथ गंभीर आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। ऐसे कठिन समय में प्रशासन की त्वरित सहायता बेहद जरूरी है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर बिरिंची कर्मकार के परिवार को 75 हजार रुपये की पूरी सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि परिवार अपनी आजीविका और सम्मानजनक जीवन को बनाए रख सके।

जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा तथा उनकी जायज मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए संगठन लगातार प्रयास करता रहेगा। संगठन ने यह भी कहा कि किसी श्रमिक की मृत्यु के बाद उसके परिवार को सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक परेशानी या देरी का सामना नहीं करना चाहिए।

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