चांडिल : बदहाल सड़क और जाम से त्रस्त जनता – एनएचएआई और मंत्री संजय सेठ पर उठे सवाल

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बदहाल सड़क और जाम से त्रस्त जनता : एनएचएआई और मंत्री संजय सेठ पर उठे सवाल

चांडिल, 27 सितंबर : टाटा-रांची फोरलेन को यात्रियों की रफ्तार और सुविधा के नाम पर बनाया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि चांडिल गोलचक्कर के पास सड़क की दुर्दशा ने इसे यातना पथ बना दिया है। जगह-जगह गड्ढों से भरी सड़क, अधूरी निर्माण प्रक्रिया और पाटा टोल प्लाजा की मनमानी ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।

एनएचएआई की लापरवाही इतनी साफ दिख रही है कि निर्माण कार्य अधूरा है, सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, लेकिन टोल वसूली निर्बाध जारी है। टोल प्लाजा की आठ में से चार लेन बंद रखकर जाम को और भयावह बनाया जा रहा है। सवाल उठता है कि जब सड़क सुविधा के नाम पर यात्रियों को कुछ नहीं मिल रहा तो यह टोल वसूली आखिर किस हक से हो रही है?

 

ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि हर महीने करीब एक हफ्ते तक सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगती हैं। मरीज, स्कूली बच्चे और नौकरीपेशा लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी कछुआ चाल से चल रहा है, ऐसे में आम लोगों के पास परेशानियां झेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

यह सड़क भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधीन है, लेकिन इसकी हालत देखकर यही कहा जा सकता है कि यह संस्था जनता के टैक्स के पैसों से खुला मजाक कर रही है। सड़क जाम, गड्ढे और टोल की मार झेल रही जनता अब एनएचएआई के खिलाफ आक्रोशित है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह क्षेत्र रांची लोकसभा के अंतर्गत आता है और यहां के सांसद सह रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि सांसद महोदय आखिर किसके प्रतिनिधि हैं? दिल्ली में मंत्री पद की चमकदार कुर्सी संभालना आसान है, लेकिन अपने क्षेत्र की जर्जर सड़कों और टोल की लूट से आंख मूंद लेना क्या जनप्रतिनिधित्व कहलाता है?

जनता का आरोप है कि संजय सेठ ने अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न एनएचएआई पर दबाव बनाया, न ही संसद या मंत्रालय स्तर पर जनता की पीड़ा को गंभीरता से रखा। जबकि हालात यह हैं कि रांची-टाटा जैसी महत्वपूर्ण सड़क पर लोग रोज़ाना जाम में फंसकर अपना समय, ईंधन और स्वास्थ्य गंवा रहे हैं।

स्थानीय लोग कहते हैं कि अब समय आ गया है कि सांसद और एनएचएआई दोनों को कठघरे में खड़ा किया जाए। सड़क सुविधा के नाम पर जबरन वसूली बर्दाश्त नहीं होगी और यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आंदोलन ही जनता का एकमात्र विकल्प होगा।

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