प्रमुख झारखंडियों ने राज्य के आदिवासियों से जनजाति सांस्कृतिक समागम के बहिष्कार की अपील की
चाईबासा, 20 मई : झारखंड के 100 से अधिक जाने-माने आदिवासी, मूलवासी, जन संगठन के प्रतिनिधि, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधि, शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संलग्न वक्तव्य जारी करके राज्य के आदिवसियों से अपील की है कि वे जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा 24 मई को नई दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम का बहिष्कार करें।
अपील में कहा गया है कि समागम का मूल सोच आदिवासी विरोधी है। जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ा एक संगठन है। इनका मानना है कि आदिवासी हिन्दू हैं एवं वर्ण व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए ये कभी आदिवासी शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं और आदिवसियों को हिन्दू वर्ण व्यवस्था में आखरी पायदान में खड़े जनजाति और वनवासी के रूप में देखते हैं।
ये संगठन एक ओर “सरना-सनातन एक” बोलकर आदिवासियों के स्वतंत्र अस्तित्व को खत्म करने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर, ईसाई आदिवासियों की आदिवासी सूची से डिलिस्टिंग की मांग कर आदिवासियों की सामूहिकता को तोड़ने में लगे हैं। यह संगठन सरना कोड के विरोधी भी हैं। ये संगठन कभी भी आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में साथ नहीं आए हैं।
आरएसएस का स्वघोषित एजेंडा है कि देश को हिन्दू राष्ट्र में बदल दें। एक ऐसा देश बनाएं जहां हिन्दू, खास कर के सवर्ण, प्रथम दर्जे के नागरिक होंगे और अन्य सभी दूसरे दर्जे के नागरिक होंगे। इसी खेल में आदिवासियों को भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आरएसएस, जनजाति सुरक्षा मंच और भाजपा की मनुवादी विचारधारा और राजनीति को झारखंड में पिछले कुछ सालों में कड़ी चुनौती मिली है। इसीलिए इनकी कोशिश है कि यहां के आदिवासियों के स्वतंत्र अस्तित्व को खत्म किया जाए।
जनजाति सांस्कृतिक समागम भी इसी दिशा में साजिश है। इसलिए राज्य भर में समाज के जाने-माने लोग आदिवासियों से अपील किए हैं कि वे 24 मई को होने वाले जनजाति सांस्कृतिक समागम एवं इसके आयोजक जनजाति सुरक्षा मंच का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। साथ ही, विरोध दर्ज करने के लिए सभा, चर्चाओं आदि जन कार्यक्रमों का आयोजन करें।
अपील जारी करने वालों में अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति, गांव गणराज्य परिषद, सरना संगोम समिति, आदिवासी मुंडा समाज महासंघ, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच, बोकारो, भारत जकत माझी परगना महल रामगढ़, पारंपरिक ग्राम सभा खूंटी, आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद, आतू सुसर समिति, संयुक्त ग्राम सभा, युवा झुमुर, आदिवासी पाहन बाबा सेवा समिति, हो लेखक संघ, आदिवासी समन्वय समिति, ग्राम प्रधान संघ, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार, ओमोन महिला संगठन समेत अनेक संगठनों के प्रतिनिधि हैं।