झारखंड में 46 आईपीएस अधिकारियों का तबादला, कई जिलों में बदले एसपी – निधि द्विवेदी को मिली सरायकेला खरसावां की कमान 

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रांची, 18 अप्रैल : राज्य सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक पुनर्गठन करते हुए 46 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा देर रात जारी अधिसूचना के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता को लेकर नए सिरे से रणनीति पर काम कर रही है।

इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर जिला स्तर पर देखने को मिला है, जहां करीब एक दर्जन जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) बदल दिए गए हैं। नए चेहरों की तैनाती के साथ सरकार ने संकेत दिया है कि प्रदर्शन और प्राथमिकताओं के आधार पर जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया जा रहा है।

सरायकेला-खरसावां जिले की कमान अब 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी निधि द्विवेदी को सौंपी गई है। दिलचस्प तथ्य यह है कि उनके पति पीयूष पांडेय भी आईपीएस अधिकारी हैं, जिससे यह नियुक्ति प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

इन जिलों में नए एसपी की तैनाती

गढ़वा में आशुतोष शेखर, बोकारो में नाथू सिंह मीणा, पाकुड़ में अनुदीप सिंह, देवघर में प्रवीण पुष्कर, रामगढ़ में मुकेश कुमार लुनायत, चतरा में अनिमेष नैथानी और हजारीबाग में अमन कुमार को एसपी बनाया गया है। इसके अलावा कोडरमा, पलामू, जामताड़ा, खूंटी समेत अन्य जिलों में भी नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति की गई है।

शहरी और ग्रामीण पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से रांची, धनबाद और जमशेदपुर में अलग-अलग ग्रामीण और सिटी एसपी की जिम्मेदारियां भी नए अधिकारियों को सौंपी गई हैं।

उच्च स्तर पर भी बदलाव

यह फेरबदल सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा। आईजी और एडीजी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं। सीआईडी, मानवाधिकार, निगरानी और अभियान जैसे संवेदनशील विभागों में नई तैनातियां की गई हैं, जो राज्य की सुरक्षा रणनीति में बदलाव का संकेत देती हैं।

सरकार ने एएसपी और एसडीपीओ स्तर पर भी कई युवा और प्रशिक्षणरत अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग दी है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन नई पीढ़ी के अधिकारियों को जमीनी अनुभव देने के पक्ष में है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तबादला केवल रूटीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाने की एक सोची-समझी पहल है। कानून-व्यवस्था, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और शहरी पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आने वाले समय में इन नई नियुक्तियों का असर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग के तौर-तरीकों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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