कुड़मी समाज के रेलवे ट्रैक जाम की आंदोलन पर प्रशासन सख्त, नीमडीह व तिरुलडीह थाना क्षेत्र के अधिकांश रेलवे स्टेशन पर धारा-144 लागू

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कुड़मी समाज के रेलवे ट्रैक जाम आंदोलन पर प्रशासन सख्त, नीमडीह व तिरुलडीह थाना के अधिकांश रेलवे स्टेशन पर धारा-144 लागू

चांडिल, 19 सितम्बर : आदिवासी कुड़मी समाज द्वारा अपनी मांगों को लेकर 20 सितम्बर को प्रस्तावित “रेल टेका आंदोलन” से पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। चांडिल अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार राय ने नीमडीह थाना एवं तिरुलडीह थाना क्षेत्र के कई रेलवे स्टेशन सहित रेल लाइन के आसपास धारा-144 लागू कर दी है।

क्यों लगाया गया प्रतिबंध?

सूत्रों के अनुसार जानकारी प्राप्त हुआ है, प्रशासन को इनपुट मिला था कि आंदोलन के दौरान रेलवे परिचालन बाधित हो सकता है और कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की आशंका है। इसको देखते हुए धारा-144 का आदेश जारी किया गया है। आदेश के मुताबिक, 19 सितम्बर शाम 6 बजे से अगले आदेश तक यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।

क्या-क्या है पाबंदी?

  • पांच या उससे अधिक लोगों का एक साथ जमा होना प्रतिबंधित रहेगा।

  • किसी भी प्रकार का हथियार, लाठी, डंडा, ढोल-नगाड़ा आदि लेकर चलना वर्जित है।

  • धरना, प्रदर्शन, जुलूस, नारेबाजी और आमसभा पर रोक रहेगी।

  • विस्फोटक या हानिकारक पदार्थ रखने पर भी पाबंदी रहेगी।

  • आदेश केवल सरकारी कार्यों और यात्री गाड़ियों के आवागमन पर लागू नहीं होगा।

सख्त निगरानी

एसडीओ ने पुलिस एवं संबंधित पदाधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। रेलवे अधिकारियों को भी सतर्क किया गया है ताकि परिचालन बाधित न हो।

कुड़मी समाज का आंदोलन क्यों

दरअसल, यह आंदोलन कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने एवं कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। कुड़मी समाज के नेताओं का दावा है कि कुड़मी समाज 1951 से पहले अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में सूचीबद्ध था लेकिन उसके बाद एक साजिश के तहत उस श्रेणी से हटा दिया गया है। पुनः, एसटी श्रेणी में सूचीबद्ध करने की मांग लेकर कुड़मी समाज द्वारा रेल टेका आंदोलन किया जा रहा है।

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