ईचागढ़ : बैंक मित्र से लूट, साथी पर हमला – आखिर किसके वरदान से बचते जा रहे हैं थाना प्रभारी?

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ईचागढ़ : बैंक मित्र से लूट, साथी पर हमला – आखिर किसके वरदान से बचते जा रहे हैं थाना प्रभारी?

अपराधियों के हमले में घायल दुर्गा सोरेन

ईचागढ़, 30 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र में अपराधियों का मनोबल इस कदर बढ़ चुका है कि वे बीच सड़क पर वारदातों को अंजाम देकर बेखौफ भाग जा रहे हैं। सोमवार शाम रांगामाटी–मिलन चौक मार्ग पर तीन अज्ञात अपराधियों ने बैंक ऑफ इंडिया के बैंक मित्र फाल्गुनी गोप और उनके साथी दुर्गा सोरेन पर हमला कर तीन लाख रुपये लूट लिए। हमले में दुर्गा सोरेन गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस की लापरवाही से बढ़े अपराधियों के हौसले

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ईचागढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस नाम की कोई चीज है भी या नहीं? न गश्ती, न चौकसी और न ही सुरक्षा व्यवस्था—नतीजा यह कि अपराधी आम लोगों पर आसानी से टूट पड़ते हैं।

लहूलुहान अवस्था में दुर्गा सोरेन

थाना प्रभारी की करतूतें उजागर, लेकिन कार्रवाई शून्य

ईचागढ़ थाना प्रभारी पर पहले भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। कुछ दिनों पहले का मामला अभी तक ताजा है, जब उन्होंने एक साधारण व्यक्ति को खाकी वर्दी पहनाकर वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात कर दिया था। इस नकली चौकीदार प्रकरण का खुलासा तब हुआ, जब नेशनल हाईवे पर ड्यूटी के दौरान नारायण गोराई की मौत ट्रक की चपेट में आने से हो गई थी। इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे की पोल खोल दी थी। अखबारों और पोर्टलों में इस शर्मनाक घटना की खूब चर्चा हुई, लेकिन आश्चर्य की बात है कि अब तक थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही जांच की औपचारिकता पूरी की गई।

अवैध बालू कारोबार में संलिप्तता के आरोप

थाना प्रभारी पर अवैध बालू खनन और परिवहन में मिलीभगत के गंभीर आरोप भी हैं। हाल ही में बालू कारोबारियों ने जिले के उपायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वैध कागजात होने पर भी उन्हें परेशान किया जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रति ट्रिप आठ हजार रुपये वसूलने के बाद ही रात के अंधेरे में सैकड़ों हाइवा ट्रक अवैध बालू ढोते हैं। इस धंधे में थाना प्रभारी की भूमिका खुलेआम उजागर हो चुकी है, जिसकी रिपोर्टें लगातार मीडिया में प्रकाशित हो रही हैं।

किसका वरदान है ईचागढ़ थाना प्रभारी पर?

नकली चौकीदार प्रकरण हो या अवैध बालू कारोबार—हर बार आरोप सीधे थाना प्रभारी पर लगते हैं, लेकिन कार्रवाई का नाम तक नहीं लिया जाता। सवाल उठता है कि आखिर थाना प्रभारी और ईचागढ़ पुलिस को किसका वरदान प्राप्त है, जिसके बल पर वे खुलेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए भी कुर्सी पर टिके हुए हैं?

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