किताब खरीदने निकला था… फिर 18 साल तक घर नहीं लौटा – दलमा के हार्डकोर नक्सली सागर सिंह की ऐसी कहानी, जिसने परिवार की आंखें नम कर दीं

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किताब खरीदने निकला था… फिर 18 साल तक घर नहीं लौटा – दलमा के हार्डकोर नक्सली सागर सिंह की ऐसी कहानी, जिसने परिवार की आंखें नम कर दीं

नीमडीह, 05 अगस्त : कोल्हान में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए दलमा के कुख्यात हार्डकोर नक्सली सागर सिंह उर्फ रवि सरदार की कहानी जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही भावुक भी। जिस बेटे के लौटने की उम्मीद परिवार ने लगभग छोड़ दी थी, उसकी गिरफ्तारी की खबर ने वर्षों बाद घर में एक अलग ही भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्हें इस बात का सुकून है कि उनका बेटा जीवित है और किसी मुठभेड़ में नहीं मारा गया।

सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र के दलमा तराई स्थित आदिवासी बहुल टेंगाडीह गांव के बेनाडीह टोला निवासी सागर सिंह महज 10 से 12 वर्ष की उम्र में नक्सली संगठन के संपर्क में आ गया था। परिजनों के अनुसार, वर्ष 2008 में वह गम्हरिया में पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान एक साथी से विवाद होने पर उसने अलग कमरा लेकर रहने की इच्छा जताई, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार उसकी यह मांग पूरी नहीं कर सका।

इसके बाद सागर ने गांव लौटकर नीमडीह के रघुनाथपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पांचवीं कक्षा में दाखिला लिया। कुछ दिनों तक वह नियमित स्कूल भी गया, लेकिन एक दिन किताब खरीदने के लिए चांडिल बाजार जाने की बात कहकर घर से निकला और फिर कभी वापस नहीं लौटा।

परिवार ने महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक उसकी तलाश की। रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। करीब पांच वर्ष बाद पुलिस के माध्यम से परिवार को जानकारी मिली कि सागर प्रतिबंधित नक्सली संगठन (CPI माओ) में शामिल हो चुका है।

सागर के पिता बताते हैं कि उन्होंने कई बार बेटे को आत्मसमर्पण कराने की कोशिश की, लेकिन कभी उससे मुलाकात तक नहीं हो सकी। घर छोड़ने के बाद सागर ने लगभग दो दशक तक न तो परिवार से संपर्क किया और न ही कभी गांव लौटा। इस दौरान उसका नाम कोल्हान के सक्रिय और इनामी नक्सलियों में शामिल हो गया।

अब पुलिस की कार्रवाई में सागर की गिरफ्तारी के बाद परिवार की भावनाएं एक बार फिर जाग उठी हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें सबसे बड़ी राहत इस बात की है कि उनका बेटा सुरक्षित है। उनका मानना है कि अब कानून के दायरे में रहते हुए उसके जीवन को नई दिशा मिल सकती है। परिवार ने यह भी बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पुलिस प्रशासन ने हमेशा उनका सहयोग किया।

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