किसके आदेश पर डोबो गांव के सरकारी तालाब में फेंका जा रहा कचरा….. ग्रामीणों में उबाल

Manbhum Updates
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चांडिल, 03 जुलाई| सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत डोबो के रुगड़ी का सरकारी तालाब इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और स्वच्छता विरोधी रवैये का शिकार हो गया है। क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है क्योंकि उक्त तालाब में कपाली नगर परिषद क्षेत्र से लाए गए कूड़े-कचड़े को खुलेआम डंप किया जा रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह घिनौना कार्य चांडिल अंचल के एक प्रशासनिक अधिकारी के मौखिक आदेश पर किया जा रहा है। नगर परिषद द्वारा शहर से इकट्ठा किया गया कचरा प्रतिदिन ट्रैक्टरों में भरकर रुगड़ी गांव (सातनाला डैम जाने वाले रास्ते पर) लाया जाता है और तालाब और आसपास में सीधे फेंका जा रहा है। इससे न केवल तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, बल्कि इसके आसपास रहने वाले ग्रामीणों का जीवन भी नरक बन गया है।

तालाब के पास बसे ग्रामीणों का कहना है कि कचरा फेंकने से इलाके में तेज दुर्गंध फैल गई है और मच्छरों की भरमार हो गई है। बीमारियों का खतरा भी अब सिर उठाने लगा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। वहीं, विरोध जताने पर “सरकारी कार्य में बाधा” उत्पन्न करने का केस दर्ज करने की धमकी दी जाती है।

डोबो गांव के निवासी एवं पूर्व विधानसभा उम्मीदवार अनूप महतो ने बताया, “यह तालाब कभी गांव की शान हुआ करता था। यहां मवेशी पानी पीते थे, महिलाएं पूजा करती थीं और ग्रामीणों के नहाने की जगह थी। लेकिन अब प्रशासन ने इसे कचरे का ढेर बना दिया है।”

एक अन्य ग्रामीण महिला गीता देवी ने कहा, “अगर प्रशासन नहीं जागा तो हम ग्रामीण सड़कों पर उतरेंगे। यह केवल एक पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि हमारे गांव की आत्मा को चोट पहुंचाना है।”

प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक मिलीभगत की बू आ रही है। जिस अधिकारी पर तालाब में कचरा डंप करवाने का आरोप है, उसने अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। वहीं, नगर परिषद और अंचल कार्यालय के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल जारी है।

स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर करोड़ों खर्च करने वाला तंत्र यदि गांव के सरकारी तालाब में शहर का कचरा फेंकता है, तो यह न सिर्फ नीति विरोधी है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। यह दर्शाता है कि निचले स्तर पर प्रशासनिक तंत्र किस हद तक संवेदनहीन और भ्रष्ट हो चुका है।

ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और तालाब की सफाई कर पुनर्वास की अपील की है।

यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो यह मामला एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह ग्राम्य जीवन, पर्यावरण और जनता की भावनाओं का सम्मान करे – अन्यथा जनता जवाब देना जानती है।

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