स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों पर जिला परिषद उपाध्यक्ष सख्त, आयुष्मान अस्पतालों और डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर होगी निगरानी
सरायकेला, 10 जून : जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, आंगनबाड़ी सेवाओं और शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर जिला परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को जिला परिषद कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जिप उपाध्यक्ष सह स्थायी समिति अध्यक्ष मधुश्री महतो ने स्पष्ट कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग सबसे अधिक चर्चा के केंद्र में रहा। आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध अस्पतालों में गरीब मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने की शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए जिप उपाध्यक्ष ने नियमित जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंदों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है, इसलिए अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पतालों में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति, साफ-सफाई तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपस्थिति पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कुकड़ू प्रखंड की स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अधिकारियों ने बताया कि जनसंख्या के आधार पर यहां नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और टेंडर भी हो गया है। वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र भवन नहीं होने के कारण डॉक्टर, एएनएम, नर्स और लैब कर्मियों के पद सृजित नहीं हो पा रहे हैं। इस पर जिप उपाध्यक्ष ने संबंधित विभाग को आवश्यक पत्राचार कर पद सृजन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया।
समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान जिले के रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका और सहायिका पदों पर लंबित नियुक्तियों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया। साथ ही पोषाहार योजना की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में शिक्षा विभाग की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी। जिला परिषद सचिव द्वारा पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं हुए और न ही विभागीय प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। इस पर जिप उपाध्यक्ष ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया।
बैठक में जिला चिकित्सा पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा जिला परिषद की स्थायी समिति के सदस्य उपस्थित थे।