एनएचएआई की लापरवाही से मौतें, गडकरी के ‘विकास’ के दावों पर भारी सन्नाटा

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एनएचएआई की लापरवाही से मौतें, गडकरी के ‘विकास’ के दावों पर भारी सन्नाटा

चांडिल, 3 जुलाई : नेशनल हाईवे (एनएच‑33) रांची-टाटा मार्ग पर स्थित चिलगु पुल की जर्जर स्थिति और पिछले नौ महीने से बंद पड़ी पुल की मरम्मत में एनएचएआई की घोर लापरवाही एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बीच आज झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आगमन से स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को फिर से मुखर कर दिया है।

पुल के बंद होने से वनवे की बाधा, जानलेवा सफर

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत चिलगु में रांची-टाटा मार्ग पर स्थित पुल को करीब नौ महीने पहले जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया था। इसके बाद से टाटा से रांची लेन को वनवे कर दिया गया है, जिससे दोनों ओर से आने-जाने वाले भारी वाहनों, बसों, ऑटो और दोपहिया वाहनों को एक ही लेन से गुजरना पड़ता है। इससे रोजाना जान का जोखिम लेकर यात्री इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।

पिछले कुछ महीनों में इस रूट पर हुई दुर्घटनाओं की संख्या 50 से अधिक बताई जा रही है। कई दुर्घटनाएं तो ऐसी रहीं, जिनमें लोगों को जान गंवानी पड़ी, लेकिन अब तक न ही एनएचएआई ने मरम्मत कार्य शुरू किया है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है।

एनएचएआई की निष्क्रियता और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार एनएचएआई से मांग की कि पुल की मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू किया जाए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि जब पुल को बंद करने में तत्परता दिखाई गई, तो मरम्मत कार्य शुरू करने में इतना विलंब क्यों?

स्थानीय प्रशासन की भी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम की सूचना के बावजूद अब तक जिलास्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। क्षेत्र क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया है कि जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है।

गडकरी के झारखंड आगमन पर उठी माँगें

आज जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी झारखंड की राजधानी रांची में एक सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे हैं, तो चिलगु पुल को लेकर पुनः जनदबाव बन गया है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि गडकरी स्वयं इस मुद्दे का संज्ञान लें और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मरम्मत कार्य का निर्देश दें।

सड़क दुर्घटना की हालिया फोटो

स्थानीय लोगों की मांग है कि चिलगु पुल की अविलंब मरम्मत शुरू की जाए, वनवे व्यवस्था खत्म कर सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए, दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा मिले, एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए

चिलगु पुल की यह स्थिति न केवल एक तकनीकी लापरवाही का मामला है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है। अगर अब भी गडकरी जैसे वरिष्ठ मंत्री इस ओर ध्यान नहीं देते, तो यह समझा जाएगा कि दिल्ली से चिलगु बहुत दूर है, और यहां की जनता की जान की कीमत शून्य मानी जाती है।

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