चांडिल : आजादी के 77 साल बाद भी सड़क को तरस रहा तुलिन गांव, डायरिया से 17 लोग बीमार

चांडिल, विशेष रिपोर्ट,12 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल प्रखंड अंतर्गत दलमा तराई में बसे चिलगु पंचायत के तुलिन गांव की तस्वीर आज भी विकास से कोसों दूर है। देश को आजाद हुए भले ही 77 वर्ष और अलग झारखंड बने 24 साल बीत चुके हों, लेकिन तुलिन गांव के नामो पाड़ा टोला में अबतक एक अदद पक्की सड़क नहीं बन पाई है।
गांव के 9–10 परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन दिनों गांव में डायरिया का प्रकोप फैला हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक करीब 17 लोग डायरिया से संक्रमित हो चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि गांव तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़मय और जर्जर है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगाई थी गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने जनता दरबार में आवेदन दिया, जिला प्रशासन से संपर्क किया, स्थानीय विधायक, सांसद, जिला परिषद सदस्य और मुखिया को भी कई बार अवगत कराया, मगर अबतक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। इस स्थिति में जब कोई बीमार होता है, तो उसे कंधे पर या खटिया पर लादकर सड़क तक लाना पड़ता है। “पक्की सड़क नहीं होने से हमारी तकलीफ कई गुना बढ़ जाती है। डायरिया जैसी बीमारी से लड़ने में हम असहाय महसूस करते हैं,”
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि गांव में पक्की सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
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