अर्जुन मुंडा, चंपई और कोड़ा को मंच से गायब कर भाजपा ने दिए बड़े सियासी संकेत!

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अर्जुन मुंडा, चंपई और कोड़ा को मंच से गायब कर भाजपा ने दिए बड़े सियासी संकेत!

विशेष संवाददाता : रांची में बने रातू रोड फ्लाईओवर का उद्घाटन अब केवल एक विकास परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि यह एक राजनीतिक संकेतक बन गया है—झारखंड की राजनीति के बदलते समीकरणों और भाजपा के अंदर चल रहे ‘मौन युद्ध’ का चुपचाप ऐलान करता हुआ।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई की ओर से जारी इस उद्घाटन समारोह का विज्ञापन सामान्य नहीं था। यह विज्ञापन DAVP के माध्यम से प्रकाशित हुआ, यानी इसे सोच-समझकर, केन्द्र सरकार की नज़र के नीचे तैयार किया गया था।

अब ज़रा नज़र डालिए अतिथि सूची पर—इसमें झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित पूर्व मुख्यमंत्रियों शिबू सोरेन, बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास के नाम शामिल हैं। लेकिन अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा और चंपई सोरेन—तीनों का नाम नदारद!

अर्जुन मुंडा का नाम क्यों नहीं?

तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा, जो प्रधानमंत्री मोदी की पिछली सरकार में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री भी थे, उनका नाम समारोह से गायब है। क्या यह अनदेखी मात्र संयोग है? या फिर भाजपा की नई रीति और नीति का संकेत?

यह वही अर्जुन मुंडा हैं, जो कभी भाजपा के ‘आदिवासी चेहरे’ माने जाते थे। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद, पार्टी के अंदर उनकी स्थिति कमजोर पड़ी है। क्या यह भाजपा की ओर से “अब आपका समय पूरा हुआ” का सांकेतिक संदेश है?

मधु कोड़ा और चंपई सोरेन की भी ‘गैर-मौजूदगी’

मधु कोड़ा—जो भले ही निर्दलीय मुख्यमंत्री रहे हों, लेकिन भाजपा से उनके संबंध किसी से छुपे नहीं। वहीं चंपई सोरेन— सालभर पहले मुख्यमंत्री पद से हटे हैं और पिछली चुनाव में भाजपा में शामिल हो चुके हैं। लेकिन उनके नाम का न होना बताता है कि भाजपा में शामिल हो जाना और स्वीकार कर लिया जाना—दो अलग बातें हैं।

भाजपा के अंदर की ‘कुर्सी कुर्सी’ का खेल

झारखंड भाजपा अब दो खेमों में बंटी दिख रही है—
‘केंद्र समर्थित’ चेहरे जैसे रघुवर दास, जिन्हें इस उद्घाटन में प्रमुखता दी गई।वहीं, ‘हाशिए पर धकेले गए’ दिग्गज जैसे अर्जुन मुंडा, जो अब शायद ‘सहूलियत से भुला दिए गए’ नेता बनते जा रहे हैं।

क्या यह महज़ लिस्टिंग भूल है या सियासी रणनीति?

राजनीति में ऐसा कुछ भी ‘महज़’ नहीं होता। अतिथियों की सूची में नाम जोड़ना-घटाना कोई WhatsApp ग्रुप बनाने जितना हल्का फैसला नहीं होता। यह सूची राजनीतिक प्राथमिकताओं की झलक देती है। और इस बार केंद्र ने झारखंड भाजपा के पुराने पत्तों को काटने का पहला इशारा कर दिया है।

हो सकता है आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा एक नई नेतृत्व शैली अपनाए—जिसमें अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा या चंपई सोरेन जैसे नेताओं को ‘कार्यकर्ता’ बना दिया जाए और पोस्टर पर नए चेहरे चिपकाए जाएं।

रातू रोड फ्लाईओवर से पहले ट्रैफिक जाम में फंसी जनता राहत की सांस ले रही होगी, लेकिन झारखंड भाजपा में कुछ वरिष्ठ नेता अब राजनीतिक ‘जाम’ में फंसे हैं। और इस उद्घाटन का मंच, मंच से गायब नामों के ज़रिए यह संदेश दे गया— “अब आपकी ज़रूरत नहीं रही, लेकिन आपके बिना तस्वीर अधूरी ज़रूर लगती है।”

सवाल यही है – क्या यह केवल उद्घाटन था?
या झारखंड भाजपा में अंतिम घंटी कुछ नेताओं के लिए बज चुकी है?

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