
21 नवंबर को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ ग्राम सीमा का होगा सीमांकन, पेसा कानून के तहत शिलालेख से चिह्नित किए जाएंगे मौजा के सीमावर्ती क्षेत्र
कुकड़ू, 04 नवंबर : ग्रामसभा को सशक्त बनाने और ग्रामीणों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से बुधवार को सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत बांदाबीर गांव में जागरूकता बैठक आयोजित की गई। गांव गणराज्य संगठन के तत्वावधान में आयोजित बैठक की अध्यक्षता पारंपरिक सरदार सोमचंद सिंह मुंडा ने की।
बैठक में संगठन के संयोजक बृहस्पति सिंह सरदार ने ग्रामसभा के अधिकार, उसकी शक्तियों और सशक्तिकरण की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामसभा की आठ स्थायी समितियों के गठन से गांव के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण जैसे कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया और नियमों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में ग्रामसभा के अंतर्गत आठ स्थायी समितियों के गठन का निर्णय लिया गया। इनमें शिक्षा एवं न्याय समिति, ग्राम विकास समिति, स्वास्थ्य समिति, कृषि समिति, निगरानी समिति, ग्राम प्रबंधन समिति, आधारभूत संरचना समिति तथा सार्वजनिक संपदा समिति शामिल हैं।
इसके अलावा पेसा कानून एवं नियमावली के तहत ग्रामसभा क्षेत्र और मौजा की सीमाओं का सीमांकन कर शिलालेख के माध्यम से चिह्नित करने का निर्णय लिया गया। यह कार्य आगामी 21 नवंबर को पारंपरिक रीति-रिवाज और गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़े के साथ किया जाएगा। इस कार्यक्रम की सूचना संबंधित पदाधिकारियों को भी देने पर सहमति बनी।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ग्रामसभाओं के सशक्त नहीं होने के कारण ग्रामीण अपने अनेक अधिकारों और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में गैर-अधिकृत तत्व इन व्यवस्थाओं का लाभ उठाते हैं। इसलिए ग्रामसभाओं को जागरूक और अधिकारसंपन्न बनाना जरूरी है।
इस दौरान गांव गणराज्य संगठन के कुकड़ू प्रखंड अध्यक्ष उमेश सिंह मुंडा, सचिव रवि सिंह मुंडा एवं संगठन सदस्य विवेक सिंह मुंडा ने कहा कि संगठन प्रखंड की सभी ग्रामसभाओं में जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए अन्य गांवों में भी जल्द बैठक आयोजित करने की तिथि निर्धारित की जाएगी।
बैठक में बीरेंद्र लोहार, गणेश मछुआ, प्रकाश सिंह पातर, दुखू राम महतो, पुन्नू मछुआ, एमेल गोप, दिलीप कुमार महतो, भोला सिंह मुंडा, पंचमी लोहार, तुष्टि मनी सिंह मुंडा, भानुमति लोहार, राजा राम महतो, चूड़ावाला सिंह मुंडा, सुखराम सिंह मुंडा सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।