दलमा में ग्रामसभा सशक्तिकरण के उद्देश्य से आयोजित हुआ एक दिवसीय संगोष्ठी – पेसा अधिनियम एवं वनाधिकार कानून पर हुई चर्चा
चांडिल, 10 जुलाई : ग्रामसभा सशक्तिकरण के उद्देश्य से पेसा कानून 1996 तथा वनाधिकार कानून 2006 के नियमों, अधिकारों और प्रक्रिया को दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी अंतर्गत माकुलाकोचा में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। सामुदायिक वनपालन संस्थान, रांची के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में अनेकों सामाजिक एवं आदिवासी समाज के संगठनों की सहभागिता रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता माकुलाकोचा के ग्रामप्रधान जयनाथ सिंह सरदार एवं रूपाय सिंह सरदार ने की, जबकि संचालन रविंद्र सिंह ने की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने ग्रामसभा सशक्तिकरण के लिए अपने विचारों को व्यक्त किया। वक्ताओं ने पेसा कानून के तहत प्राप्त अधिकारों, नियमों और ग्रामसभा की भूमिका का व्याख्यान किया। वहीं, वनाधिकार कानून 2006 के तहत वन क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासियों एवं मूलवासी समुदाय के अधिकारों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इस दौरान दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में पर्यटन तथा विकास के नाम पर जंगल उजाड़ने का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि वन्य प्राणियों एवं प्रकृति के संरक्षण के बजाय वन विभाग द्वारा उन्हें नष्ट करने को आतुर है। वक्ताओं ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया गया है, ऐसे में पर्यटन विभाग द्वारा जंगलों के बीच में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य कैसे किया जा रहा है? कहीं न कहीं इसमें वन विभाग की मिलीभगत और सहमति है तभी आज दलमा में विकास और पर्यटन के नाम पर जंगलों को उजाड़ा जा रहा है। दूसरी ओर विकास कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर प्रक्रिया शुरू किया गया है। जब इको सेंसेटिव जोन की घोषणा की गई और भारत सरकार के गजट पर भी स्पष्ट कहा गया है कि इको सेंसेटिव जोन क्षेत्र के निवासियों को स्वरोजगार प्रदान किया जाएगा तो अब तक वन विभाग ने कितने लोगों को स्वरोजगार उपलब्ध कराया है? उसका डाटा सार्वजनिक करें।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुखलाल पहाड़िया, रविन्द्र सरदार, हरीश चंद्र भूमिज, करमू मार्डी, जागरण पाल, धर्मेश, जेवियर कुजूर, सोहनलाल कुम्हार, सूर्यमणी भगत, राजेश महतो, बृहस्पति सिंह सरदार, जयनाथ सिंह सरदार, शंकर सिंह सरदार, बसंती सरदार, सविता सोरेन, सुखदेव कर्मकार, जितु पहाड़िया, गुरुचरण कर्मकार आदि मौजूद थे।