चांडिल में निकली भव्य कलश यात्रा, भक्तिमय माहौल में हुई मां कालरात्रि की पूजा

MANBHUM UPDATES
4 Min Read

जयकारों और शंखध्वनि से गूंजा क्षेत्र, कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का आह्वान – मंदिरों और पूजा पंडालों में उमड़े श्रद्धालु

चांडिल, 17 अक्टूबर : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर चांडिल अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। शनिवार को नवरात्र की सप्तमी तिथि पर विभिन्न स्थानों पर भव्य कलश यात्राएं निकाली गईं। पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विधि-विधानों के बीच आयोजित इन यात्राओं में महिलाओं एवं युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण कर निकलीं श्रद्धालु महिलाओं की टोली, मां दुर्गा के जयकारों और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालु स्थानीय जलाशयों, नदियों और प्राकृतिक नालों तक पहुंचे, जहां से विधि-विधान के साथ जल भरकर यात्रा प्रारंभ की गई। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर अपने दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों तक पहुंचे। इस दौरान मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ी इस यात्रा में महिलाओं एवं युवतियों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। कलश यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की और परिवार तथा समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा पंडालों एवं मंदिरों में कलश स्थापना के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां दुर्गा का आह्वान किया गया। श्रद्धालुओं ने संकल्प लेकर माता की आराधना की तथा परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और क्षेत्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को दुष्टों का संहार करने वाली तथा अपने भक्तों को भय और संकट से मुक्ति दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका स्वरूप भले ही उग्र है, लेकिन वे अपने भक्तों पर सदैव कृपा बरसाती हैं। मां कालरात्रि की आराधना से भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

सप्तमी पूजा को लेकर चांडिल अनुमंडल के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। महिलाओं, युवतियों और अन्य भक्तों ने पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों और पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

शारदीय नवरात्र का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। कलश यात्रा में सामूहिक भागीदारी और मंदिरों में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस भावना को और मजबूत किया। मां दुर्गा की आराधना के साथ श्रद्धालु बुराई पर अच्छाई की विजय, सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना कर रहे हैं। चांडिल क्षेत्र में नवरात्र की सप्तमी के साथ ही दुर्गोत्सव की धार्मिक गतिविधियों में और तेजी आ गई है।

Share This Article