“बीज के गोले से हरियाली की ओर : पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम में जुड़ीं गांव की महिलाएं और युवा”

जमशेदपुर/पूर्वी सिंहभूम,7 जुलाई : “पर्यावरण बचेगा तभी हम बचेंगे”— इसी सोच के साथ मेराकी संस्था ने पूर्वी सिंहभूम जिले में पर्यावरण संरक्षण की एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य है — जिले की बंजरभूमि और जंगलों को हराभरा बनाना, वो भी मिट्टी के बीज गोलों के माध्यम से।
संस्था ने एक लक्ष्य तय किया है – 1 लाख बीज गोले तैयार कर उन्हें जंगलों, पहाड़ियों और सूखी जमीनों पर फेंका जाएगा। इन गोलों में इमली, जामुन, आम, कटहल जैसे फलदार पौधों के बीज डाले जा रहे हैं। बारिश के मौसम में ये गोले फटेंगे और बीज अंकुरित होकर हरियाली का स्वरूप धारण करेंगे।

महिलाओं और युवाओं की सहभागिता:
इस पूरे अभियान में गांव की महिलाएं, किशोरियाँ और युवा लड़के-लड़कियाँ पूरे मनोयोग से जुटे हैं। वे मिट्टी में बीज मिलाकर गोलों को आकार दे रहे हैं और फिर इन्हें धूप में सुखा रहे हैं। यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें पर्यावरण के प्रति प्रेम और जागरूकता झलकती है।
रीता पात्रों (सचिव, मेराकी संस्था) ने कहा : “हम सिर्फ बीज नहीं, हरियाली बो रहे हैं। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण संकट में है। ऐसे में हमारी यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपहार होगी। हमारा लक्ष्य है — जिले के हर प्रखंड की बंजरभूमि को फलदार वृक्षों से हरा-भरा बनाना।”
प्रभाव और उद्देश्य:
बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना
ग्रामीण समुदाय को फल और संसाधनों से आत्मनिर्भर बनाना
आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरा-भरा वातावरण देना
जनमानस में सकारात्मक संदेश:
इस मुहिम से यह स्पष्ट होता है कि जब समाज की जड़ें— महिलाएं और युवा— एक सकारात्मक सोच के साथ काम करते हैं, तो प्रकृति भी उनका साथ देती है। यह पहल न केवल हरियाली का बीज बो रही है, बल्कि समाज में सामूहिक चेतना और जिम्मेदारी का भी अंकुर फूट रहा है।
ManbhumUpdates की अपील:
पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों का दायित्व नहीं है, यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि एक संस्था और ग्रामीण महिलाएं मिलकर यह कर सकती हैं, तो हम सभी मिलकर इस अभियान को एक जन-आंदोलन बना सकते हैं।
आइए, एक बीज हम भी बोएं — हरियाली के, आशा के, जीवन के।



