सिरूम में ‘रातेर परी नित्य झंकार’ की धूम, पौराणिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मोहा मन

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जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने किया उद्घाटन, झारखंड आंदोलनकारी सुनील महतो ने संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर दिया जोर

कुकड़ू, 23 अक्टूबर : सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत सिरूम में गुरुवार को शहीद स्मारक समिति की ओर से पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रातेर परी नित्य झंकार’ का भव्य आयोजन किया गया। पौराणिक कथाओं और सामाजिक संदेशों पर आधारित इस बांग्ला सांस्कृतिक अनुष्ठान में हजारों की संख्या में ग्रामीणों और दर्शकों ने हिस्सा लिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो और शहीद धनंजय महतो के पुत्र उपेंद्रनाथ महतो ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस दौरान आयोजन स्थल पर उत्साह का माहौल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।

मधुश्री महतो ने संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

उद्घाटन के अवसर पर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कहा कि हमारी लोक संस्कृति और पारंपरिक अनुष्ठान समाज की पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। उन्होंने आयोजन के लिए शहीद स्मारक समिति सिरूम के सदस्यों की सराहना की।

सुनील महतो ने परंपरा को आगे बढ़ाने का किया आह्वान

झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो ने कहा कि हमारी संस्कृति और परंपराएं समाज को एक सूत्र में बांधती हैं। पौराणिक कथाओं पर आधारित ऐसे कार्यक्रम मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा, लोककला और पारंपरिक आयोजनों को जीवित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में गंगाधर महतो, अशोक कुमार महतो, अवनी मंडल, पंचानन महतो, आशीष महतो, पप्पू प्रमाणिक, विभीषण महतो सहित शहीद स्मारक समिति सिरूम के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। समिति ने कहा कि ऐसे आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी एकता को भी बढ़ावा देते हैं।

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