
चांडिल : चांडिल डैम के विस्थापितों ने एक बार फिर अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए सरकार और जल संसाधन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को विस्थापित मुक्ति वाहिनी के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में विस्थापितों ने सुवर्णरेखा परियोजना के चांडिल स्थित अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में नौकरी, विस्थापन मुआवज़ा, पुनर्वास नीति का सख्ती से पालन, बकाया ज़मीन का मुआवज़ा, विस्थापित समितियों को ही नौका संचालन की जिम्मेदारी रोजगार की गारंटी, और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता शामिल है।
धरना स्थल पर आंदोलनकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों पहले विस्थापित किए गए परिवारों को आज तक समुचित मुआवज़ा और पुनर्वास नहीं मिल पाया है। जबकि परियोजना का लाभ सरकार और निजी कंपनियाँ उठा रही हैं, विस्थापित आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

विस्थापित मुक्ति वाहिनी के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। साथ ही उन्होंने जल संसाधन विभाग पर विस्थापितों की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया।
धरना स्थल पर स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं अन्य सामाजिक संगठनों के कुछ सदस्यों ने भी पहुंचकर समर्थन जताया और सरकार से शीघ्र समाधान निकालने की अपील की। वहीं, विस्थापित मुक्ति वाहिनी ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में परियोजना के अधिकारियों को एक मांगपत्र सौंपा है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिससे विस्थापितों में रोष और बढ़ता जा रहा है। इस मौके पर नारायण गोप, श्यामल मार्डी, बासुदेव आदित्यदेव, कार्तिक चन्द्र महतो, पंचानन महतो, अरुण गोप, ईश्वर गोप, भजन गोप समेत अनेकों विस्थापित आंदोलनकारी मौजूद थे।


