कोड़ाडीह में करम का महासंगम, पीले रंग में रंगा मैदान : कुड़मी समाज ने दिखाई सांस्कृतिक एकजुटता
पुरुलिया, 21 सितंबर : करम परब केवल पूजा या एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत मानभूम अंचल के लोगों की संस्कृति, परंपरा और आस्था से गहराई से जुड़ा पर्व है। इसका जीवंत उदाहरण 20 सितंबर को पुरुलिया के कोड़ाडीह मैदान में देखने को मिला, जहां आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से आयोजित विशाल करम महाजुटान में बड़ी संख्या में लोग जुटे।
पुरुलिया जिला के टामना थाना अंतर्गत बराबाजार-पुरुलिया मार्ग पर स्थित कोड़ाडीह गांव रविवार को करम की पारंपरिक रंगत में डूबा नजर आया। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी उत्साह के साथ आयोजन में शामिल हुए। पारंपरिक परिधान, गीत-संगीत और नृत्य के बीच करम पर्व की सांस्कृतिक छटा देखने को मिली।
मूल मानता मूल खूंटी अजीत प्रसाद महतो के नेतृत्व में आयोजित इस महाजुटान में कुड़मी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का व्यापक प्रदर्शन हुआ। आयोजन के मंच से समाज की विभिन्न मांगों और मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
कार्यक्रम की खास तस्वीर मैदान में नजर आए पीले रंग के सैलाब की रही। बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्र पहनकर पहुंचे थे। मंच से अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने भी इस दृश्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर से कार्यक्रम स्थल को देखने पर चारों ओर केवल पीला रंग ही नजर आ रहा था।
करम महाजुटान ने कोड़ाडीह को एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। विशाल जनसमूह की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि करम पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानभूम क्षेत्र की लोक-संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है।




