बारिश के बीच उमस भरी गर्मी से बेहाल ग्रामीण, बिजली विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
चांडिल, 03 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में बिजली विभाग की लापरवाही और सुस्त कार्यशैली का खामियाजा इन दिनों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। भुइयांडीह में 11 हजार वोल्ट का एक बिजली पोल गिरने के बाद चिलगु समेत आसपास के कई गांव पिछले 72 घंटे से अंधेरे में डूबे हैं। बारिश के मौसम में उमस भरी गर्मी के बीच बिजली गुल रहने से ग्रामीणों और बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।
चिलगु, भुइयांडीह, हारुडीह, धातकीडीह, भादूडीह समेत आसपास के गांवों में मंगलवार से बिजली आपूर्ति बाधित है। ग्रामीणों का कहना है कि एक पोल गिरने के बाद तीन दिन तक बिजली आपूर्ति ठप रहना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गांवों में घरेलू कामकाज से लेकर बच्चों की पढ़ाई और मोबाइल चार्जिंग तक प्रभावित हो रही है। वहीं, बारिश के बावजूद उमस भरी गर्मी में बिजली नहीं रहने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार को भुइयांडीह में 11 हजार वोल्ट का बिजली पोल गिर गया था। इसके बाद पूरे इलाके की बिजली काट दी गई। बुधवार को विभाग की ओर से पोल को दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया गया, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। गुरुवार को एक बार फिर पोल लगाने का काम शुरू किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक विभाग की सारी कवायद नाकाफी है।
बिल वसूली में तत्परता, बिजली बहाली में सुस्ती
बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिल में महज दो-चार हजार रुपये का बकाया होने पर विभाग के कर्मचारी और अधिकारी घर तक पहुंच जाते हैं और कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन जब विभाग की ओर से बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो उसे दुरुस्त करने में तीन दिन से अधिक का समय लग रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि “बिजली बिल वसूलने में विभाग को एक दिन की भी देरी मंजूर नहीं होती, लेकिन बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए 72 घंटे भी कम पड़ रहे हैं। आखिर उपभोक्ताओं की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को आम उपभोक्ताओं की परेशानी से कोई खास सरोकार नहीं रह गया है। उनका कहना है कि यदि किसी तकनीकी खराबी या पोल गिरने की घटना के बाद तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तो पूरे क्षेत्र को तीन दिनों तक अंधेरे में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग के लिए यह सिर्फ एक पोल गिरने की घटना हो सकती है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए 72 घंटे तक बिजली के बिना रहना रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला गंभीर संकट है।


