कभी माओवादियों का गढ़ था कोल्हान, अब आखिरी दौर में जंग – 10 लाख के इनामी समेत चार नक्सलियों ने हथियार डाले

MANBHUM UPDATES
4 Min Read

चाईबासा/सरायकेला, 11 अगस्त : कभी माओवादियों के मजबूत प्रभाव वाले कोल्हान, पोड़ाहाट, सारंडा, दलमा आदि के जंगल अब नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई के गवाह बन रहे हैं। लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के बीच झारखंड पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य सलुका कायम समेत चार सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

आत्मसमर्पण करने वालों में एक लाख रुपये का इनामी कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ति और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में सक्रिय अनिता तामसोय शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों के समक्ष एके-47, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और बड़ी संख्या में कारतूस समेत हथियार व अन्य सामान जमा किए गए।

नक्सली संगठन की कमर टूटी, अब बचे हैं मुट्ठीभर कैडर

कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोफा ने इसे नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद और विश्वास कायम करना भी जरूरी है। उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर हिंसा का रास्ता छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

सीआरपीएफ डीआईजी ने शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि कोल्हान में अब सुरक्षा के साथ विकास पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यानी जिस इलाके में कभी बंदूक और बारूद का खौफ था, वहां अब विकास की नई तस्वीर खींचने की तैयारी है।

सरायकेला-जमशेदपुर में अब सिर्फ 5-6 नक्सली!

सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी के मुताबिक जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में अब करीब पांच से छह नक्सली ही सक्रिय बचे हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने वालों के लिए सरकार की नीति का रास्ता खुला है, लेकिन हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ सुरक्षा बल कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

डीआईजी के अनुसार असीम मंडल का दस्ता अब सुरक्षा बलों के निशाने पर है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान लगातार जारी है।

एक साल में बदली कोल्हान की तस्वीर

पिछले एक वर्ष के दौरान बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कोल्हान में माओवादी संगठन की पकड़ काफी कमजोर हुई है। कभी नक्सलियों के प्रभाव और गतिविधियों के लिए कुख्यात रहे सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी ने संगठन के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।

चार नक्सलियों का हथियारों के साथ आत्मसमर्पण इसी बदलती तस्वीर का संकेत है। कोल्हान में माओवाद का वह दौर, जिसने दशकों तक सुरक्षा और विकास दोनों के सामने चुनौती खड़ी की, अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ चार नक्सलियों के आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि कोल्हान जैसे कभी माओवादी गढ़ रहे इलाके में संगठन के लगातार सिकुड़ते प्रभाव का बड़ा संकेत है।

Share This Article