हस्तकरघा हमारी संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक : राज्यपाल

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जमशेदपुर में 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह का आयोजन, विभिन्न राज्यों से पहुंचे बुनकर, कई कारीगर हुए सम्मानित

जमशेदपुर, 07 अगस्त : बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में शुक्रवार को 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों से आए बुनकरों और कारीगरों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम का आयोजन वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की ओर से किया गया था। समारोह में झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में बुनकर और हस्तकरघा कारीगर पहुंचे। कार्यक्रम में हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा सामाजिक, राजनीतिक और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि हस्तकरघा केवल एक कला नहीं, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हस्तकरघे से जुड़ा प्रत्येक धागा और प्रत्येक बुनाई हमारी लोककथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी कहानी बयां करती है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस का आयोजन केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि उन लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान का अवसर भी है, जो अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने हस्तकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने और बुनकरों को उचित सम्मान एवं अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता आनंद साहू ने कहा कि जमशेदपुर में पहली बार इस तरह के भव्य स्तर पर हस्तकरघा दिवस समारोह का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से बुनकरों और कारीगरों का पहुंचना जमशेदपुर के लिए गौरव की बात है।

आयोजकों ने बताया कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस घोषित किए जाने के बाद से संगठन की ओर से प्रत्येक वर्ष देश के अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों और कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ भारतीय हस्तकरघा की समृद्ध परंपरा को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान बुनकरों और कारीगरों ने अपने पारंपरिक उत्पादों और हुनर का प्रदर्शन भी किया। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और हस्तकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत पर जोर दिया गया।

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