भुइयाडीह की इंद्रानगर-कल्याणनगर बस्ती के 145 मकानों पर कार्रवाई की आशंका, बस्तीवासियों ने उपायुक्त कार्यालय पर किया प्रदर्शन

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भुइयाडीह की इंद्रानगर-कल्याणनगर बस्ती के 145 मकानों पर कार्रवाई की आशंका, बस्तीवासियों ने उपायुक्त कार्यालय पर किया प्रदर्शन

जमशेदपुर, 30 जुलाई : भुइयाडीह स्थित इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती में संभावित अतिक्रमण हटाओ अभियान की आशंका को लेकर बस्तीवासियों में दहशत का माहौल है। बस्ती के दर्जनों निवासी गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और संभावित बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से राहत की गुहार लगाई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2023 में शहर की 86 बस्तियों में कराए गए सर्वेक्षण के दौरान इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती के 145 मकानों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए चिन्हित किया गया था। इसके बाद संबंधित परिवारों को नोटिस भी जारी किया गया था।

बस्तीवासियों का आरोप है कि अब इन मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। उनका दावा है कि आगामी 6 अगस्त को दंडाधिकारी की नियुक्ति कर बुलडोजर कार्रवाई की योजना बनाई गई है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।

संभावित कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान वहां से गुजर रहे पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता तथा मानगो नगर निगम की महापौर सुधा गुप्ता का वाहन रोककर लोगों ने अपनी समस्या से अवगत कराया और हस्तक्षेप की मांग की।

बस्तीवासियों ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि प्रशासन से वार्ता कर उनके आशियाने बचाने की दिशा में पहल की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से वे इसी बस्ती में रह रहे हैं और उनके पास रहने के लिए कोई अन्य विकल्प नहीं है।

इस मौके पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी है तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा किसी अन्य सरकारी योजना के तहत पहले लोगों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद ही मकान तोड़ने जैसी कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, बस्तीवासियों की मांग है कि जब तक पुनर्वास की समुचित व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। वहीं, प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।

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