दिव्यांगजनों से संबंधित लंबित मामलों की सुनवाई एवं निष्पादन हेतु मोबाइल कोर्ट सह जागरूकता शिविर का आयोजन

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जमशेदपुर, 24 जुलाई : महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार द्वारा दिव्यांगजनों से संबंधित लंबित मामलों की सुनवाई, त्वरित निष्पादन तथा उनके अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा में मोबाइल कोर्ट सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य नि:शक्तता आयुक्त कीर्ति श्री, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधि, सीएसआर पार्टनर तथा बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी (UDID) कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनी सहायता, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 तथा अन्य विभागीय सेवाओं से संबंधित जानकारी एवं परामर्श उपलब्ध कराया गया। साथ ही पात्र दिव्यांगजनों के बीच सहायक उपकरणों का वितरण भी किया गया, जिससे उनके दैनिक जीवन को अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनाया जा सके।

इस अवसर पर राज्य नि:शक्तता आयुक्त कीर्ति श्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यक सभी सेवाएं एवं सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि यूडीआईडी कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, सहायक उपकरण, पेंशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता तक सीमित रखना उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें कौशल विकास, स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी प्राथमिकता है। जब दिव्यांगजन मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित करेंगे, तभी समाज में उनकी वास्तविक भागीदारी और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।

उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता दिव्यांगजनों तक उनके अधिकारों एवं सरकारी सुविधाओं की सहज, सरल एवं समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मोबाइल कोर्ट एवं जागरूकता शिविर दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किए जाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता प्रदान की गई है, इसलिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं एवं अधिकारों की जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए जिले में जागरूकता वाहन संचालित कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रमुख प्रावधानों, कानूनी अधिकारों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने दिव्यांगजनों एवं उनके परिजनों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा उपलब्ध योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील किया।

टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने दिव्यांगजनों के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं आजीविका आधारित पहलों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि समाज में अभी भी जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे सरकार, प्रशासन, उद्योग एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से दूर किया जा सकता है। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए बैरियर-फ्री (सुगम) वातावरण विकसित करने, समावेशी सोच को बढ़ावा देने तथा शिक्षा, रोजगार एवं सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी समान पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

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