चांडिल के हिरिमिली में शिव मंदिर का हो रहा पुनर्निर्माण, आस्था और चमत्कार की अनोखी गाथा समेटे है प्राचीन शिवलिंग
चांडिल, 22 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत हिरिमिली (दालग्राम) स्थित प्राचीन शिव मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य इन दिनों ग्रामीणों के सहयोग से कराया जा रहा है। मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिए स्थानीय लोगों ने पहल की है। चांडिल प्रखंड प्रमुख रामकृष्ण महतो ने भी श्रद्धालुओं से मंदिर निर्माण में सहयोग करने की अपील की है, ताकि पुनर्निर्माण का कार्य शीघ्र पूरा हो सके।
ग्रामीणों के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग से जुड़ी एक अत्यंत रोचक और चमत्कारिक कथा पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। बताया जाता है कि कई दशक पहले पश्चिम बंगाल के कुछ लोग बैलगाड़ी पर इस शिवलिंग को लेकर जा रहे थे। इसी दौरान हिरिमिली गांव के समीप बैलगाड़ी का एक पहिया टूट गया। पहिया ठीक करने के लिए शिवलिंग को नीचे उतारा गया, लेकिन मरम्मत के बाद लाख प्रयासों के बावजूद शिवलिंग को दोबारा बैलगाड़ी पर नहीं चढ़ाया जा सका। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद उन लोगों के साथ कुछ विचित्र घटनाएं भी घटीं, जिसके चलते वे शिवलिंग को वहीं छोड़कर चले गए। तभी से शिवलिंग इसी स्थान पर विराजमान है।
ग्रामीण एक और घटना का भी उल्लेख करते हैं। उनका कहना है कि समय-समय पर शिवलिंग को दूसरे स्थान पर स्थापित करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। इसके बाद ग्रामीणों ने पत्थर और मिट्टी से एक छोटा मंदिर बनाकर नियमित पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
बताया जाता है कि बाद में स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत कैनाल निर्माण के दौरान यह मंदिर और शिवलिंग प्रस्तावित मार्ग के बीच आ रहे थे। प्रशासन ने शिवलिंग और मंदिर को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार हर बार निर्माण कार्य में बाधाएं उत्पन्न होने लगीं और मशीनें बार-बार खराब हो जाती थीं। इसे ग्रामीण भगवान भोलेनाथ की इच्छा और चमत्कार मानते हैं। अंततः कैनाल का मार्ग बदल दिया गया और मंदिर को यथास्थान सुरक्षित रखा गया।
आज उसी स्थान पर ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान भोलेनाथ स्वयं अपनी इच्छा से यहां विराजमान हुए हैं और सच्चे मन से दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।