दलित बस्ती के बच्चों के बीच पहुंचे थाना प्रभारी संतन तिवारी, सामुदायिक पुलिसिंग की मिसाल पेश की

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दलित बस्ती के बच्चों के बीच पहुंचे थाना प्रभारी संतन तिवारी, सामुदायिक पुलिसिंग की मिसाल पेश की

चांडिल, 19 जून : सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत नव प्राथमिक विद्यालय, हरिजन टोला में आयोजित सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम ने पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं सहयोग की एक नई मिसाल पेश की। इस अवसर पर चांडिल थाना प्रभारी संतन तिवारी ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों के बीच पठन-पाठन सामग्री का वितरण किया तथा उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में मुखिया मनोहर सिंह सरदार, विद्यालय के शिक्षक तथा समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हरिजन टोला स्थित विद्यालय में पहुंचकर बच्चों के साथ आत्मीय संवाद करना और उनकी जरूरतों को समझने का प्रयास थाना प्रभारी की संवेदनशील कार्यशैली को दर्शाता है।

संतन तिवारी ने बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हुए नियमित रूप से विद्यालय आने और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों से अपने परिवार के सदस्यों को भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने और सड़क सुरक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश देने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया और समाज को नशामुक्त बनाने में उनकी भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही बच्चों को “गुड टच” और “बैड टच” की जानकारी देकर उनकी सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

स्थानीय लोगों ने कहा कि अक्सर समाज के वंचित और दलित तबकों तक सरकारी तंत्र की पहुंच सीमित रह जाती है, लेकिन चांडिल थाना प्रभारी द्वारा स्वयं विद्यालय पहुंचकर बच्चों के बीच समय बिताना और उन्हें प्रोत्साहित करना एक सकारात्मक संदेश देता है। उनकी यह पहल दर्शाती है कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान एवं जागरूकता के लिए भी प्रतिबद्ध है।

ग्रामीणों एवं शिक्षकों ने थाना प्रभारी संतन तिवारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनसरोकार से जुड़े कार्यक्रम जारी रहेंगे।

सामुदायिक पुलिसिंग के तहत आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।

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