चांडिल, 11 जून : राज्य में 10 जून से एनजीटी के तहत नदियों से बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो चुका है। अवैध बालू खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसी कड़ी में सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने एनजीटी लागू होने के पहले ही दिन एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कपाली क्षेत्र से अवैध रूप से बालू परिवहन कर रहे एक वाहन को जब्त किया है। हालांकि इस कार्रवाई ने जहां प्रशासन की सक्रियता को सामने रखा है, वहीं निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उपायुक्त के निर्देश पर खनन विभाग एवं कपाली ओपी की संयुक्त टीम ने 10 जून की देर रात पुडिसिली चौक में वाहन जांच अभियान चलाया। इस दौरान बालू लदे टिप टेलर वाहन संख्या JH01FQ5184 को रोका गया। जांच के दौरान चालक वैध परिवहन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद वाहन को जब्त कर कपाली ओपी में सुरक्षित रखा गया। मामले में नियमानुसार अग्रेतर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन की इस तत्पर कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि अवैध खनन और बालू परिवहन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आवश्यक है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हो सके और सरकार को राजस्व क्षति से बचाया जा सके।
लेकिन इसी के साथ स्थानीय लोगों के बीच एक बड़ा सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब जिले में अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए विभिन्न थाना क्षेत्रों, चेक नाकों और निगरानी बिंदुओं पर लगातार जांच अभियान चलाए जाने का दावा किया जाता है, तब बिना वैध कागजात के बालू से लदा यह भारी वाहन आखिर कपाली तक पहुंचा कैसे?
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि वाहन किसी नदी घाट या बालू भंडारण स्थल से निकलकर कपाली तक पहुंचा है, तो उसे रास्ते में कई थाना क्षेत्रों, जांच स्थलों और निगरानी बिंदुओं से होकर गुजरना पड़ा होगा। ऐसे में यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि क्या वाहन सभी जांच व्यवस्थाओं को पार करते हुए आगे बढ़ गया, या फिर कहीं न कहीं निगरानी तंत्र में चूक हुई है?
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जब्त वाहन बालू लेकर किस स्थान से आ रहा था और उसका गंतव्य क्या था। यदि जांच में यह सामने आता है कि वाहन जिले के किसी क्षेत्र से अवैध रूप से बालू लेकर चला था, तो मामला और भी गंभीर हो सकता है।
गौरतलब है कि हाल ही में जिला खनन टास्क फोर्स की बैठक में उपायुक्त ने संवेदनशील क्षेत्रों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर टोल प्लाजा के समीप भी विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि केवल वाहन जब्त करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि यह भी पता लगाया जाए कि अवैध बालू परिवहन की पूरी श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल हैं और वाहन इतनी दूरी तक बिना वैध दस्तावेज के कैसे पहुंच गया।
एनजीटी लागू होने के पहले ही दिन हुई यह कार्रवाई निश्चित रूप से जिला प्रशासन और खनन विभाग की सक्रियता को दर्शाती है। लेकिन साथ ही यह घटना इस ओर भी संकेत करती है कि अवैध बालू कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए केवल छिटपुट कार्रवाई नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर पूरे नेटवर्क का खुलासा करता है या नहीं।