तिरुलडीह में रात के अंधेरे में दौड़ रहीं सैकड़ों हाइवा! वैध बालू परिवहन या अवैध कारोबार? खनन विभाग पर जिप उपाध्यक्ष का बड़ा हमला
कुकड़ू, 23 मई : सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह क्षेत्र में इन दिनों बालू के कथित अवैध खनन और परिवहन को लेकर माहौल गर्म हो गया है। रात के अंधेरे में सैकड़ों हाइवा वाहनों से बालू ढुलाई की चर्चा अब गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। इस पूरे मामले को लेकर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने जिला खनन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और विभागीय कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।
जिप उपाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें ग्रामीणों के माध्यम से जानकारी मिली कि तिरुलडीह थाना क्षेत्र से लगातार भारी मात्रा में बालू का परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 19 मई से लगातार रात के समय हाइवा वाहनों की लंबी कतारें तिरुलडीह से होकर नीमडीह क्षेत्र से गुजरकर विभिन्न इलाकों तक जा रही हैं।
मधुश्री महतो के अनुसार, 20 मई को उन्होंने व्हाट्सएप के माध्यम से तिरुलडीह और नीमडीह पुलिस को इसकी सूचना देकर कार्रवाई करने को कहा था। साथ ही दोनों प्रखंडों के अंचलाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने जिला खनन पदाधिकारी से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि आखिर यह बालू परिवहन वैध है या जिले में अवैध कारोबार को खुली छूट दी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि खनन विभाग को पूरे मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
जिप उपाध्यक्ष ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग टास्क फोर्स की बैठकों में उपायुक्त और वरीय अधिकारियों को गलत जानकारी देकर गुमराह करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर केवल जुर्माना लगाकर छोड़ देने की प्रवृत्ति ने बालू माफियाओं का मनोबल बढ़ा दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और कठोर दंड का प्रावधान है, तो बार-बार पकड़े जाने वाले वाहनों और कारोबारियों को राहत क्यों दी जाती है? क्या खनन विभाग की नरमी ही अवैध कारोबार को संरक्षण देने का कारण बन रही है?
क्षेत्र में लगातार हो रहे कथित अवैध बालू परिवहन को लेकर अब ग्रामीणों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि रातभर भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और खनन विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा या फिर अवैध बालू कारोबार यूं ही रात के अंधेरे में फलता-फूलता रहेगा।
इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। मानभूम अपडेट्स पत्रकार ने खनन पदाधिकारी से फोन पर जानकारी लेने के लिए फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।