आदिवासी विरोधी संगठन के द्वारा आदिवासी सोच को समाप्त करने का कार्यक्रम है जनजाति सांस्कृतिक समागम
चाईबासा, 23 मई : आदिवासी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में 24 मई को दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम का कोल्हान मुख्यालय चाईबासा में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के द्वारा सामाजिक बहिष्कार सह विरोध प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर रमेश जेराई ने कहा कि यह कार्यक्रम मूल रूप से आदिवासी विरोधी संगठन के द्वारा आदिवासी सोच को समाप्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। समागम कार्यक्रम का आयोजन “जनजाति सुरक्षा मंच” के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार द्वारा संचालित है।
उन्होंने कहा कि संघ परिवार हमेशा से आदिवासियों को वनवासी या जनजाति कहकर ही संबोधित करता है, साथ ही आदिवासियों को सरना-सनातन एक है जैसे शब्दों से जोड़ते आया है। यहां किसी से छुपा नहीं है कि “जनजाति सुरक्षा मंच” और “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” को भारतीय जनता पार्टी का संरक्षण प्राप्त है और पूरे देश में भाजपा को किस तरह से जाति और धर्म की राजनीति कर रही है ये भली भांति सब जानते हैं। मौके पर साधु हो ने कहा कि जल जंगल जमीन की लड़ाई में भाजपा कभी सामने नहीं आती, बल्कि सिर्फ जाति और धर्म में राजनीति करके अपना वोट बैंक तैयार करती है।
वर्तमान में भाजपा की केंद्र सरकार है, ऐसे में बुनियादी जरूरत और वास्तविक मुद्दों से भटकाकर, सिर्फ और सिर्फ धर्म की राजनीति कर रही है और आदिवासियों को आपस में उलझाकर इसी तरह से भटका कर रखना चाहती है। यह आदिवासियों के अस्तित्व का सवाल है। इसलिए कोल्हान सहित झारखंड और पूरे देश में “जनजाति सांस्कृतिक समागम” कार्यक्रम का बहिष्कार किया जा रहा है। बहिष्कार सह विरोध प्रदर्शन में प्रकाश पूर्ति, गणेश पाट पिंगुवा, हिरामनी देवगम, सागर सिंकु, बिष्णु मिंज, दमयंती सिंकु, यदुनाथ तियु, चंद्रमोहन बिरूवा, बामिया बारी, सनी संदीप देवगन, रेयांश सामाड उदय सिंह बारी, नीतु देवगम एवं अन्य कई आदिवासी सामाजिक संगठन के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।